
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। सरकार ने राइट टू एजुकेशन एक्ट बनाकर भले ही अपने फर्ज की इतिश्री कर ली हो, लेकिन प्राइवेट स्कूल और उनकी प्रबंधक कमेटियां मनमर्जी करने से बाज नहीं आ रही हैं। एक तरफ तो कई ऐसे स्कूल हैं जो कम से कम पैसों यानि फीस में बच्चों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करके पुण्य कमा रहे हैं तो दूसरी तरफ अधिकतर पूंजीपतियों व असर रसूख वालों के प्रबंधन के तहत चलने वाले शिक्षण संस्थाओं की मनमर्जी को रोकने वाला कोई नहीं। क्योंकि जिन लोगों यानि कि अधिकारियों या नेताओं ने कार्यवाही करनी होती है उनकी आंखों पर तो जैसे पट्टी बंध जाती है तथा वह इनकी लूट के मुद्दे को हर बार की तरह घुमा फिरा कर टाल जाते हैं।

हाल ही में कई स्कूलों में मोटी दाखिला फीस, प्रतिमाह व तिमाही फीस के अलावा महंगी किताबों व कापियों के साथ-साथ वर्दी व स्टेशनरी का मुद्दा काफी गर्माया रहा, लेकिन मजाल है किसी अधिकारी की या राजनेता की, कि उसने इनके खिलाफ कोई कार्यवाही को अंजाम दिया हो।
ताजा उदाहरण शहर के प्रसिद्ध एसएवी जैन डे-बोर्डिंग स्कूल की है, जहां के प्रबंधकों ने बच्चों के अभिभावकों को एक पत्र जारी करके उनकी कनसेन्ट मांगी है कि गर्मी के कारण बच्चों का पंखों व कूलर के नीचे बैठना मुश्किल है तथा एसी लगाए जाने का प्रावधान है, जिसके लिए मई से अक्टूबर तक 1000 रुपये का शुल्क दोना होगा। स्कूल प्रबंधकों द्वारा लिए गए इस फैसले में बच्चों का हित कितना है आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं। जबकि अगर स्कूल बच्चों को कोई सुविधा देना चाहता है तो वह उसे अपने स्तर पर प्रबंध करता है, न कि इसका बोझ भी बच्चों के अभिभावकों पर डाला जाए। स्कूल द्वारा जारी पत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने पर एक नया ही विवाद एवं चर्चा शुरु हो गई है।
इस संबंध में स्कूल प्रबंधक कमेटी के प्रधान जीवन जैन ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग बात का बतंगड़ बना देते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पत्र इसी साल का है तथा हमने तो बच्चों की सहूलत के लिए अभिभावकों की कनसेन्ट मांगी है। अगर, वह नहीं कहेंगे तो हम एसी नहीं लगवाएंगे।
दूसरी तरफ इस संबंधी बात करने पर जिला शिक्षा अधिकारी हरजिंदर कौर ने कहा कि वह सोमवार को कार्यालय जाकर इस संबंधी पूरी जानकारी हासिल करेंगी तथा स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ जो भी कार्यवाही होगी की जाएगी।












