
नई दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट- पलक। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर है तथा देश ने आज एक अनमोल हीरा खोया है।

डा. मनमोहन सिंह ने 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। डा. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के गाह नाम गांव (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। जिसके बाद 1947 में देश आजाद होने के बाद उनका पूरा परिवार अमृतसर में आ गया था।
डा. मनमोहन सिंह ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। 1952-1954 में होशियारपुर के सरकारी कॉलेज से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की थीं और उस समय यहीं पढ़ाया भी। जिस कारण उनका होशियारपुर के साथ भी गहरा संबंध था। जिसके बाद उन्होंने 1957 से 1966 पंजाब यूनिवर्सिटी में ही अर्थशास्त्र के सीनियर फैकेल्टी के रूप में नौकरी की थी। आगे की पढ़ाई करने के लिए मनमोहन सिंह विदेश चले गए। साल 1957 में उन्होंने ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से प्रथम श्रेणी के साथ अर्थशास्त्र में स्नातक पूरी की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1962 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नूफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में पीएचडी की।
विदेश में पीएचडी पूरी करने के बाद उन्हें जब डॉक्टर की उपाधि मिली, उसके बाद मनमोहन सिंह, डा. मनमोहन सिंह बने। डा. मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र पढ़ाया। छात्र उन्हें शिक्षक के रूप में काफी पसंद करते थे।
बता दें कि उन्हें जिनेवा में दक्षिण आयोग में महासचिव के रूप में भी नियुक्त किया गया था। 1982-1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रुप में मौद्रिक नीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके बाद 1985-1987 में उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहते हुए भारत की आर्थिक योजना में योगदान दिया।
1991 में डा. मनमोहन सिंह ने भारत की राजनीति में अपना कदम रखा। उन्होंनें 1991 में वित्त मंत्री रहते भारत में उदारीकरण की शुरुआत की थी। 2004-2014 तक डा. मनमोहन सिंह लगातार 10 वर्षों तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, मनरेगा योजना समेत की ऐसे बड़े फैसले लिए जो देश के लिए आज मिसाल बन गए है।
डा. मनमोहन सिंह को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया जैसे- भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, जो कि उन्हें 1987 में दिया गया था। इसके अलावा 1995 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार, 1993 और 1994 वर्ष के वित्त मंत्री के लिए एशिया मनी पुरस्कार, 1993 वर्ष के वित्त मंत्री के लिए यूरो मनी पुरस्कार, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का एडम स्मिथ पुरस्कार और कैम्ब्रिज में सेंट जॉन्स कॉलेज में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए राइट पुरस्कार।
डा. मनमोहन सिंह के मार्गदर्शन से देश को एक नई दिशा तथा बुलंदिया मिली, जिसके लिए देश हमेशा उन्हें याद रखेंगा और उनका आभारी रहेंगा।











