
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। जो महिलाएं पार्षद बन गई हैं या पहले भी बन चुकी हैं वे तो घरों में बंद रहती हैं और अधिकतर महिला पार्षदों के परिवार के पुरुष सदस्य ही काम करते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि पार्षद महिलाओं के परिवार के लोग अधिकारियों को साथ लेकर अपने क्षेत्र के कामों का निरीक्षण करने तथा अधिकारियों को निर्देश देने के लिए जाते हैं। पंजाब सरकार इसे सख्ती से रोके।

कोई भी अधिकारी पार्षदों के साथ तो इलाके की हालत देखने या नए काम शुरू करवाने जाए, पर उनके पति पुत्रों के साथ जाकर इलाके में यह प्रभाव देना कि पार्षद वे स्वयं हैं और पार्षद पति बनकर जनता पर भी रौब जमाते हैं तथा अधिकारियों पर भी। सरकार यह आदेश जारी करे कि ये अधिकारी या तो इलाके की जनता के बुलाने पर जाएं या पार्षद के साथ जाएं। पार्षदों के रिश्तेदार के साथ जाना और पार्षद की तरह अधिकारियों से और जनता से व्यवहार या बुरा व्यवहार करना, इसकी आज्ञा सरकार को नहीं देनी चाहिए।












