
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत सरकार ने रसोई गैस की कीमत बढ़ाकर आम जनता को, गरीब परिवारों को बहुत बड़ी सजा दी है। पहले ही रसोई का सारा सामान महंगा है। क्या सरकार जानती है कि आटा 40 से 45 रुपये किलो तकक रहा है और आम आदमी हिंदुस्तान में केवल रोटी खाता है। उनके पास फल, मेवे, नमकीन, मीठा खाने के लिए तो पैसे नहीं होते। कम से कम तीन बार गरीब के घर में रोटी बनती है। आटा महंगा है, दालें महंगी हैं। घी की बात तो दूर रही सरसों का तेल भी बहुत महंगा है और सब्जियां भी साल में दो तीन बार गरीब का कचूमर निकाल देती हैं।
मुझे हैरानगी तो अपने मीडिया वालों पर भी है, प्याज या टमाटर महंगा हो जाए तो सुबह से शाम तक इस महंगाई की दुहाई देते हैं, लेकिन आटा महंगा होने की कोई बात नहीं करता।

आश्चर्य यह है कि किसान से 2200 रुपये क्विंटल गेहूं लेने के बाद व्यापारी और सरकार मिलकर नफा कमा लेते हैं और उपभोक्ता को आटा चालीस रुपये किलो मिलता है। क्या सरकार जानती है कि चालीस रुपये किलो भी साधारण आटा कहा जाता है, सुपर क्वालिटी का नहीं। आटा दाल पहले ही महंगी, खाने का तेल महंगा और अब जले पर नमक डालने की तरह सरकार ने गैस महंगी कर दी। भारत सरकार गैस भी सस्ती करे और दैनिक जीवन में रसोई में जो कुछ चाहिए उसकी महंगाई एकदम कम करे। सरकार कहती है अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त मिल रहा है, लेकिन जो कीमत देकर खरीदते हैं उनको महंगा दिया जा रहा है यह अन्याय है।











