
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़), संदीप डोगरा। शहर के सैंट्रल टाउन में नियमों को ताक पर रखकर तंग गली में रिहायशी नक्शे पर बन रही बहुमंजिला इमारत के मामले का संज्ञान लेते हुए इस मामले में ढिलाई बरतने के आरोप में निगम कमिशनर डा. अमनदीप कौर ने बिल्डिंग इंस्पैक्टर कुलजीत सिंह को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन सवाल है कि मामला उजागर होने के बाद मौके पर तैनात इंस्पैक्टर पर ढिलाई बरतने की कार्यवाही करते हुए उसे तो निलंबित कर दिया गया, लेकिन जिस इंस्पैक्टर के कार्यकाल में इमारत पास हुई और उस समय जिसका कर्तव्य बनता था कि वह उसे समय-समय पर जाकर जांच करता और शुरुआती दौर में ही उसकी नींव को धवस्त करता तो शायद इमारत के मालिक द्वारा इतनी बड़ा ढांचा न खड़ा किया जाता। लेकिन अधिकारियों ने अपने उच्चाधिकारियों एवं जनता के बीच अपनी छवि साफ सुथरी बनाए रखने के लिए एक कमजोर कड़ी पर सारी गाज गिराते हुए एक इंस्पैक्टर को निलंबित करके अपने फर्ज की इतिश्री कर दी। यह भी चर्चा है कि कहीं इंस्पैक्टर को उसके द्वारा नोटिस दिए जाने की सजा तो नहीं दी गई। क्योंकि, पता चला है कि इस बात को लेकर राजनेता जी काफी नाराज चल रहे हैं। चर्चा है कि कहीं उसे वहां जाने की सजा ही न दे दी गई हो। लेकिन यह तो अधिकारी ही स्पष्ट कर पाएंगे कि अंदर का मामला क्या है?

15 मई 2025 को द स्टैलर न्यूज़ की तरफ से इस बात का खुलासा किया गया था कि सैंट्रल टाउन में रिहायशी नक्शे पर तीन मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई और इस मामले के उजागर होने के बाद निगम में हड़कंप मच गया। क्योंकि खुली जगह में इतनी बड़ी इमारत बन जाती तो शायद उसे रेगुलर करने के ढंग इम्प्लीमेंट हो जाते, पर इतनी जंग जगह पर इतनी बड़ी इमारत का बनना सरकार व सरकारी तंत्र की ईमानदारी पर सवाल था वहीं इतना सब हो गया और वह भी संबंधित विभाग के मंत्री के शहर में, जो अपने आप में बड़ा सवाल है।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस इमारत को बना रहे मालिक की पहुंच एवं पैसे की ताकत के आगे सभी नियम छिक्के पर टांग दिए गए और एक राजनेता के दवाब में काम करने को विवश निगम कर्मियों की बेबसी रही कि वह इस पर कार्यवाही नहीं कर पाए, अन्यथा निगम की मर्जी के बिना कोई एक ईंट तक नहीं लग सकता। सैंट्रल टाउन पूरी तरह से रिहायशी इलाका है और वहां पर इतनी बड़ी इमारत को बनाने की इजाजत का कोई नियम नहीं है, लेकिन इतना जरुर है कि किसी अपने को लाभ देने के लिए सत्ता आसीन राजनेताओं द्वारा नियमों में कुछ बदलाव करवा दिया जाए तो इसके बारे में हम कुछ नहीं कह सकते। नियम के अनुसार इतनी बड़ी कमर्शियल इमारत बनाने के लिए सबसे पहले रिहायशी जमीन का सीएलयू (यानि कि चेंज आफ लैंड यूज़) लेना पड़ता है तथा नियमानुसार इस मोहल्ले में सीएलयू नहीं हो सकता, क्योंकि इसके लिए तय नियम पूरे नहीं होते। जैसे सड़क का तय मानक तक चौड़ा होना, सड़कों की इंटरलिंक होना यानि कि रास्तों की इंटरक्नेक्टिविटी तथा फायर सेफ्टी जैसे सख्त नियम लागू होने के चलते तंग जगह में इतनी बड़ी इमारत की इजाजत किसी भी नियम एवं एक्ट के तहत संभव नहीं पर उक्त मामले में सारी परिस्थितियां राजनीतिक दवाब की ओर इशारा कर रही हैं।
उक्त मामले में पिछले कर्मियों के कार्यकाल को अनदेखा करते हुए मौजूदा पर गाज गिराना तर्कसंगत नहीं माना जा रहा। बल्कि अधिकारियों को इस मामले की गहनता से जांच करवानी चाहिए थी कि यह किसकी उदासीनता एवं लापरवाही से हुआ और उस राजनेता का भी नाम सार्वजनिक करना चाहिए जिसके दवाब में सारा काम चल रहा था व चल रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या नगर निगम अधिकारी इस मामले में ढील बरतने वालों के नाम उजागर करके उन पर कोई कार्यवाही करते हैं या फिर मौजूदा समय में तैनात जिसे हाल ही में शायद 2-3 माह ही हुए होंगे यहां पोस्टिड हुए होंगे, पर कार्यवाही करने तक ही सीमित रखा जाता है। जबकि इमारत को बनते हुए करीब डेढ़ साल से भी अधिक का समय हो चुका है। अधिकारियों की मानें तो इस मामले में इमारत बना रहे मालिक को नोटिस दिया गया है तथा उसकी तरफ से क्या जवाब आता है, के बाद ही अगली कार्यवाही को अमल में लाया जाएगा।
अकसर देखा गया है कि सत्ता आसीन राजनेता दवाब में अधिकारियों एवं कर्मियों को गलत काम करने को विवश करते हैं तथा जब मामला उजागर होता है तो उस स्थिति में अपना पल्ला झाड़कर सारी गाज ऐसे ही निम्न स्तर के कर्मियों पर गिराकर जनता के बीच सच्चे सुच्चे होने का दिखावा करते नहीं थकते। जैसा कि इस मामले में देखने को मिल रहा है। फिलहाल तो गेंद अधिकारियों के पाले में है और वह इसे अपने स्तर पर जो भी बनती कार्यवाही है के द्वारा सख्त रवैया अपनाए हुए हैं, बात यह है कि जब दवाब डालने वाले राजनेता का नाम उजागर होगा उस समय स्थिति क्या रहती है यह भी अपने आप में बड़ा सवाल है। वैसे भी कट्टर ईमानदार सरकार को देखना चाहिए कि आखिर उसके कौन से राजनेता हैं जो दवाब में अधिकारियों को काम करने को विवश व मजबूर कर रहे हैं।












