Thursday, October 15, 2026
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एचएसवीपी में हुआ घोटाला 225 करोड़ तक पहुंचा, पूर्व विधायक सहित 2 गिरफ्तार

चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। चंडीगढ़ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में हुए 72 करोड़ का फर्जीवाड़ा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद 225 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है। ईडी की ओर से पंचकूला कोर्ट में दायर रिमांड पत्र के अनुसार सुरजाखेड़ा को खुद के और पत्नी मंजीत सहित परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में घोटाले की रकम प्राप्त की गई है। इसके अलावा सुरजाखेड़ा और सुनील कुमार बंसल ने बलविंदर सिंह, हरिंदर पाल सिंह आदि से सीधे नकदी प्राप्त की। इस मामले में एचएसवीपी के पूर्व अधिकारी सुनील कुमार बंसल और पूर्व विधायक रामनिवास सुरजखेड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब कई बिल्डर भी ईडी के रडार पर हैं, जिनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। जानकारी मुताबिक 2015 से 2019 में जब फर्जीवाड़ा हुआ, तब रामनिवास सुरजाखेड़ा 2017 तक और सुनील कुमार बंसल 2019 तक एचएसवीपी में क्रमश: अकाउंट असिस्टेंट और सीनियर अकाउंट ऑफिसर पद पर कार्यरत थे।

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ईडी ने लगभग 10 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इन्हीं बयानों से 72 करोड़ से बढ़कर 225 करोड़ रुपये तक के इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इन 10 लोगों के खातों में लगभग 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे और यह सभी लोग पूर्व विधायक के नजदीकी बताए जा रहे हैं।   बताया जा रहा है कि यह रकम पूर्व विधायक तक पहुंचाई जाती थी। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि कुछ बिल्डरों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर हुई थी। ईडी ने 2 साल पहले हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। ईडी के अनुसार सुरजाखेड़ा ने माना है कि जिन लोगों के बैंक खातों में एचएसवीपी के खाते से रकम जाती थी उन्हें सुरजाखेड़ा और सुनील कुमार बंसल रुपये भेजने से पहले और बाद में फोन करते थे। आईडीबीआई बैंक की लोहगढ़ शाखा ने सुरजाखेड़ा को खाते से बड़ी मात्रा में नकदी निकाले जाने की जानकारी दी थी।  इसके एवज में उसने उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर खोले गए बैंक खातों की जानकारी मांगी। इस मामले में एचएसवीपी के और भी अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका है, जिसकी जांच की जा रही है। लंबे समय से एचएसवीपी में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ईडी ने लगभग 200 बैंक खातों की जांच की है। अधिकारियों और बिल्डरों ने मिलकर फर्जी कंपनियों को यह राशि रिफंड की थी।

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