
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। हर राजनीतिक दल में, सरकारों में कुछ ऐसे विधायक सांसद रहते हैं जिनका जब राजनीति से मन भर जाता है या उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होतीं तो वे झटपट इस्तीफा दे देते हैं। कभी पार्टी से कभी विधायक पद से और यह कह देना जैसा अभी अनमोन मान ने कहा है कि राजनीति से उनका मन भर गया है। ऐसे त्यागपत्र देने वाले विधायकों को यह याद रखना चाहिए कि जनता ने उनको पांच वर्ष की ड्यूटी दी है। पांच वर्ष जनता की सेवा करना। इनका प्राथमिक कर्तव्य है।

कर्तव्य को छोड़कर इस तरह पलायन करना जनता के साथ अन्याय है और जो विधायक या सांसद इस तरह इस्तीफा देते हैं वे जानते हैं कि उन्हें जो पेंशन मिलनी है विधायक के नाते वह तो मिल ही जाएगी अन्य सभी लाभ भी। पंजाब सरकार और भारत सरकार को यह काूनन बनाना चाहिए कि जो सांसद और विधायक अपना पांच वर्ष का समय पूरा नहीं करते उन्हें उन सभी लाभों से वंचित किया जाए जो उन्हें पांच वर्ष बीतने के बाद भी मिलते रहते हैं। अगर सरकारी कर्मचारी को पेंशन पाने के लिए- वैसे सरकारों ने तो अब पेंशन ही बंद कर दी-पूरा समय नौकरी करनी पड़ती है। उसी प्रकार विधायकों को भी पांच वर्ष का समय पूरा करना चाहिए, जो इनकी ड्यूटी है जनता के लिए भी सरकार के लिए भी।












