
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत सरकार ने आनलाइन गेमिंग बिल पास करके बहुत से बच्चों नौजवानों को आनलाइन जुआ खेलने से रोकने का प्रयास किया है, पर हैरानगी है कि जो जुआ आनलाइन नहीं पर सीधे सीधे चलता है, क्लबों में चलता है, होटलों में चलता है, सरकार को टैक्स देकर चलता है उस जुए पर कोई सरकारी न रोक है न नियंत्रण है। एक बात हैरानगी की है कि क्या सरकार यह भूल गई कि एक करोड़ रुपया कितना होता है। यह ठीक है कि अधिकतर सांसद, मंत्री इस देश में करोड़ों के स्वामी हैं, पर हर व्यक्ति जो आनलाइन गेमिंग या जुआ खेलता है वह तो करोड़ों का मालिक नहीं। क्या सरकार की इच्छा यही है कि एक बार वे जेल में चले जाएं, सजा भुगतने के बाद जब तक जुर्माना नहीं दे सकेंगे, कभी बाहर नहीं आएंगे। सरकार को अलग जेलें बना देनी चाहिए जहां लंबे समय तक आनलाइन गेमिंग या जुआ खेलने वाले रखे जाएंगे।

सरकार के पास तो अभी इतनी जेलें भी नहीं हैं। आज की तिथि में जितनी क्षमता जेल में कैदियों को रखने की है, कहीं कहीं तो उससे चार गुणा ज्यादा रखे हुए हैं। वैसे संसद कुत्तों को नियंत्रण करने के लिए कोई कानून नहीं बना सकी और अफसोस की बात है कि भारत जैसे देश में लिव इन रिलेशन की वकालत करने वाले और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बुराई को संरक्षण देने के कारण पारिवारिक ढांचा टूट रहा है। बच्चे भटक रहे हैं, उस पर भी संसद मौन रही और परिवार टूट रहे हैं, टूटते रहेंगे।
लक्ष्मीकांता चावला












