
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत सरकार ने यह जानकारी तो जनता को दे कि पिछले वर्ष 37 लाख से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा और सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय भी दे दिया, जो अधिकतर कुत्तों के पक्ष में तो नहीं, लेकिन कुत्ता प्रेमियों को जरूर प्रसन्न कर गया। मेरा सुप्रीम कोर्ट से यह निवेदन है और भारत सरकार से भी निवेदन है कि पिछले वर्ष या पिछले दस वर्षों में जो लोग कुत्तों के काटने से मर गए और कुछ अपाहिज भी हो गए उनके लिए क्या राहत राशि देने की सुप्रीम कोर्ट ने आज्ञा दी है या भारत सरकार दिलाएगी?

यह सारे भारत की समस्या है। एक तो बहुत जरूरी है कि भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दे कि पिछले दस वर्षों में कितने लोग कुत्तों के काटने से मारे गए, कितने हलकाय गए। असली हालत तो यह है कि हमारे श्री दुर्ग्याणा मंदिर में एक दिन में एक कुत्ते ने छह लोगों को काटा था, पर प्रशासन उसे पकड़ने को तैयार नहीं हुआ क्योकि कुछ कुत्ता प्रेमी पुलिस लेकर आ जाते थे। इनमें से एक इतना ज्यादा गंभीर था कि उसे एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजना पड़ा। जो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया उससे फिर जनता कुत्तों के रहम पर रह गए। वैसे अफसोस है कि हम विश्व की बहुत बड़ी सेना के स्वामी हैं, चौथी अर्थव्यवस्था बन गए हैं, पर कुत्तों से हमारी रक्षा कोई नहीं कर सका।












