
हिमाचल प्रदेश (द स्टैलर न्यूज़)। हिमाचल प्रदेश में जनता के पैसे से बनीं पानी की स्कीमों की मशीनरी पर चोर हाथ साफ कर रहे हैं और जलशक्ति महकमा बेबस है। चोर तांबे के तार, ट्रांसफॉर्मर, पंप समेत अन्य मशीनरी चोरी कर रहे हैं। पुलिस में मामला दर्ज किया जाता है और अभी चोरों को पकड़ा भी नहीं जाता कि उसके बाद फिर दूसरी चोरी हो जाती है। हैरत की बात तो यह है कि कई जगहों में एक ही स्कीम पर दो से तीन बार चोरियां हो रही हैं। पिछले ढाई साल में चोरों ने कुल 4,80,54,158 रुपये की मशीनरी चुरा ली।

यह खुलासा आरटीआई एक्ट के तहत ली जानकारी में हुआ है। सबसे अधिक चोरियां जुब्बल मंडल में 1,01,54,000 रुपये की मशीनरी की हुई है। दूसरे स्थान पर ठियोग का मतियाना मंडल है। मतियाना मंडल में 73,65,000, नूरपुर में 59,63,000, कुल्लू में 53,32,192, राजगढ़ में 50,97,331, नाहन में 33,39,000, बागी में 27,90,700, सरकाघाट में 22,35,000, जसूर में 17,73,355, शिलाई में 13,44,000, ऊना में 10,63,000, झंडूता में 8,28,580, बड़सर में 3,50,000, नगरोटा बगवां में 2,79,000 और कसुम्पटी में 1,40,000 रुपये की चोरियां हुई हैं।
यूपीए सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय इस्पात उपभोक्ता परिषद के निदेशक मंडल के सदस्य रहे ठियोग निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अमित मेहता ने यह जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत ली है। उन्होंने आशंका जताई कि चोरियों के पीछे अंतरराज्यीय गिरोह हो सकता है। चोरी वाले इन 15 मंडलों में से केवल शिलाई में ही तीन योजनाओं में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ये कैमरे सभी स्कीमों पर लगाए जाने चाहिए।
जलशक्ति विभाग की स्कीमों में बड़ी संख्या में चोरियां होने पर चरणबद्ध तरीके से सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। जैसे-जैसे फंड मिलेगा, वैसे-वैसे कैमरे लगाए जाएंगे। राज्य में पानी की करीब 10 हजार योजनाएं हैं। सभी योजनाओं पर एक साथ कैमरे लगाना संभव नहीं है।












