
चंडीगढ़ (द स्टैलर न्यूज़)। प्रोजेक्ट ‘जीवनजोत-2’ के तहत ढाई महीने तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बाल भिखारियों को बस स्टैंड रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से रेस्क्यू किया गया। पंजाब सरकार इन बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी शिक्षा की भी व्यवस्था साथ ही इन बच्चों का डीएनए टेस्ट कराकर यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इनसे भीख मंगवाने वाले लोग उनके असली माता-पिता हैं या उनका अपहरण या चोरी हुई है। इस परियोजना के तहत बचाए गए 15 बच्चों में से 13 की डीएनए रिपोर्ट मिल गई है। इन रिपोर्टों से पता चला है कि जिन बच्चों से इन्हें बरामद किया गया है। वे उनके असली माता-पिता हैं। इन सभी बच्चों का अपहरण या चोरी नहीं हुई है।

फिलहाल, बठिंडा से बचाए गए 2 बच्चों की डीएनए रिपोर्ट आनी बाकी है। इसके बाद ही उनके बारे में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद, अब सभी बच्चों को उनके परिवारों/रिश्तेदारों को सौंप दिया जाएगा। परिवारों से लिखित में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों से दोबारा भीख नहीं मंगवाई जाएगी। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब सरकार भीख मांगने वाले बच्चों को रेस्क्यू करके उन्हें पढ़ने के लिए स्कूल भेजेगी। इस संबंध में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 भी जारी किया गया है ताकि अगर कोई बच्चा भीख मांगता दिखे तो तुरंत सूचना दी जा सके।












