Monday, October 12, 2026
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मानसून से पहले आपदा तैयारी को मजबूत करने के लिए नौशहरा में भारतीय सेना ने किया ‘हिफाज़त: राहत-ए-अवाम’ अभ्यास

जम्मू/राजौरी (द स्टैलर न्यूज़)। आगामी मानसून मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन तैयारियों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भारतीय सेना ने राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में ‘अभ्यास हिफाज़त: राहत-ए-अवाम’ का आयोजन किया। यह एक व्यापक सैन्य-नागरिक समन्वय (मिलिट्री-सिविल फ्यूजन) अभ्यास था, जिसका उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता का आकलन करना था।

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इस अभ्यास में भारतीय सेना, नागरिक प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया। सभी एजेंसियों ने एक साझा मंच पर आपदा प्रबंधन योजनाओं की समीक्षा की, आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने की रणनीतियों का परीक्षण किया तथा मानवीय सहायता एवं राहत कार्यों के लिए समन्वय को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

अभ्यास को तवी नदी के किनारे स्थित संवेदनशील एवं निचले इलाकों में संभावित बाढ़ और आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसकी शुरुआत संयुक्त टेबल-टॉप अभ्यास से हुई, जिसमें विभिन्न एजेंसियों ने आपदा प्रबंधन योजनाओं, मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), संसाधनों की उपलब्धता तथा आपसी समन्वय तंत्र की समीक्षा की। विभिन्न काल्पनिक परिस्थितियों पर आधारित चर्चाओं और वॉर-गेमिंग के माध्यम से आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

अभ्यास का मुख्य आकर्षण तवी नदी में संयुक्त बाढ़ बचाव एवं निकासी प्रदर्शन रहा। इस दौरान समन्वित खोज एवं बचाव अभियान, घायलों की निकासी, नौकाओं के माध्यम से बचाव कार्य, रस्सियों की सहायता से नदी पार कराने की तकनीक तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों तक पहुंचाने की प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया। महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों जैसे संवेदनशील वर्गों के बचाव एवं देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया।

अभ्यास के दौरान आपदा राहत में उपयोग होने वाले विशेष उपकरणों, लॉजिस्टिक सहायता संसाधनों, ड्रोन आधारित निगरानी प्रणालियों तथा अत्याधुनिक संचार तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा चिकित्सा एवं राहत शिविर प्रदर्शन के तहत एडवांस्ड ड्रेसिंग स्टेशन की स्थापना, मोबाइल मेडिकल टीम की तैनाती, मेडिकल निकासी अभ्यास तथा राहत शिविर प्रबंधन प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया।

इस अभ्यास का अवलोकन सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, राजौरी एवं पुंछ जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने किया। इसके अतिरिक्त सरपंचों, विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) तथा स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लेकर आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

‘अभ्यास हिफाज़त: राहत-ए-अवाम’ के सफल आयोजन ने सभी सहभागी एजेंसियों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने, आपसी समन्वय बढ़ाने तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर सहायता सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया। यह पहल नागरिक प्रशासन को सहयोग देने, आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाने तथा स्थानीय आबादी की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के प्रति भारतीय सेना की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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