
मुंबई (द स्टैलर न्यूज़)। मुझे लगता है कि कॉमेडी पूरी तरह सही समय पर सही बात कहने और आसपास की चीजों पर ध्यान देने पर निर्भर करती है। रोजमर्रा की ज़िंदगी में हमारे सामने ऐसी कई मजेदार परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन उस वक्त हमें एहसास भी नहीं होता कि उनमें कितनी कॉमेडी है। एक्टर के तौर पर हमें उन छोटी छोटी बातों को पर्दे पर लाने का मौका मिलता है। कई बार चेहरे का एक साधारण सा हावभाव या थोड़ी देर का ठहराव लंबे डायलॉग से भी ज्यादा हँसा सकता है।

‘भूत बंगला’ जैसी फिल्म में, जहाँ हालात इतने अनोखे हैं, वहाँ मजा इसी बात में है कि आप उन पर कितनी सहजता से प्रतिक्रिया देते हैं। किरदार के तौर पर आपको उस स्थिति को गंभीरता से लेना होता है, भले ही दर्शक उस पर हँस रहे हों। यही बात कॉमेडी को असरदार बनाती है।











