Thursday, October 22, 2026
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मित्रता समझनी हो तो भगवान कृष्ण और सुदामा का प्रसंग जरुर सनें व पढ़ें: केशव दत्त शास्त्री

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्री नंद अन्नपूर्णा मंदिर चैरीटेबल सोसायटी एकता नगर की तरफ से करवाए जा रहे श्री रुद्र महायज्ञ एवं श्री मद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के दसवें दिन मुख्य यजमान सुरेश अग्रवाल व कविता अग्रवाल तथा अन्य यजमानों ने यज्ञ में आहुति डाली। इस मौके पर आचार्य राजिंदर प्रसाद ने कहा कि यज्ञ की पहचान अग्नि है और अग्नि यज्ञ का अहम हिस्सा है जोकि प्रतीक है शक्ति का ऊर्जा का सदा ऊपर उठने का इसी अग्नि में ताप भी छिपा है और भाप भी छिपी है। यह अग्नि जलाती भी है तो प्रकाश भी देती है। इस अग्नि से जल भी बनता है, जो मानव जीवन के लिए नहीं अपितु पूरी प्रकृति के लिए वरदान में अमृत है। इस मौके पर सोसायटी के महासचिव तरसेम मोदगिल ने बताया कि श्रीरुद्ध चण्डी महायज्ञ की पूर्णाहुति 6 मार्च को दोपहर 1 बजे डाली जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए आहुति डालने की सुविधा सायं 5 बजे तक की गई है ताकि नौकरीपेशा लोग या समय में आ पाने वाले श्रद्धालु सायं 5 बजे तक पहुंचकर पूर्णाहुति का लाभ ले सकें। उन्होंने बताया कि इस दौरान भंडारे की भी व्यवस्था रहेगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार मंदिर में पहुंचकर आहुति में नारियल डाल सकते हैं।

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6 मार्च को दोपहर 1 बजे डाली जाएगी श्रीरुद्ध चण्डी महायज्ञ की पूर्णाहुति, सायं 5 बजे तक डाल सकेंगे आहुति और लगेगा भंडारा

श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन स्वामी केशव दत्त शास्त्री जी आगरा वालों ने कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान श्री कृष्ण जी की लीलाओं का वर्णन किया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस ला कर मां देवकी को वापस देना, सुभद्रा हरण व अन्य कथाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाती है वो भगवान श्री कृष्ण और सुदामा से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुदामा ने भगवान के दर्शन के लिए पत्नी के कहने पर जब द्वारिका जी जाने का मन बनाया तो उनके मन में दोस्त के लिए कोई उपहार लेकर जाने का मन हुआ। लेकिन अति द्रिदरता के कारण उनके पास कुछ भी नहीं था। लेकिन उनकी पत्नी ने एक मुट्ठी चावल दिए।

सुदामा जी जब द्वारिका जी पहुंचे तो उन्होंने भगवान के दर्शनों के लिए द्वारपाल को कहा। लेकिन सुदामा जी की हालत देखकर द्वारपाल उन्हें वहां से जाने को कहता है। बारबार कहने पर एक द्वारपाल जब भगवान श्री कृष्ण को सूचना देने गया तो द्वारपाल के बताते ही भगवान श्री कृष्ण अपने मित्र से मिलने के लिए दौड़े और उन्हें आदर सहित महल में ले जाकर अपने सिहांसन पर बिठाया। भगवान ने उनके चरण धोए और उनकी खूब सेवा की। भगवान से सुदामा के पास पोठली देखकर रहा न गया और उन्होंने सुदामा से पूछा कि वे क्या छिपा रहे हैं। लेकिन सुदामा अपनी गरीबी को छिपाते रहे। भगवान ने उनसे पोठली छीन ली और चावल के दानों का जैसे ही सवाद चखा तो एक-एक चावल के दाने के साथ ही सुदामा की द्रिदरता को दूर कर दिया। भगवान ने सुदामा के बिना मांगे ही सब कुछ दे दिया। यह होती है मित्रता कि मित्र ने कहा भी नहीं और उन्होंने सबकुछ दे दिया। हमें भी सुदामा जैसे भाव से ही भगवान का ध्यान करना चाहिए। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण एवं रुकमणी विवाह की झांकी भी पेश की गई।

इस अवसर पर स्वामी केशव दत्त शास्त्री द्वारा गाये भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमें। इस अवसर पर सोसायटी के अध्यक्ष प्रधान रमेश अग्रवाल, महासचिव तरसेम मोदगिल, सुभाष अग्रवाल, दविंदर वालिया गुरु जी, संजीव अरोड़ा, राजिंदर मोदगिल, रमेश गंभीर, वृज बिहारी, शोभन सिंह, विशाल वालिया, विकास सिंगला, नील शर्मा, राजीव शर्मा, नील कमल, विवेक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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