
रिपोर्ट: प्रीति पराशर।
हरियाना (द स्टैलर न्यूज़)। रेत माफिया पर नकेल डालने के लिए सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जहां पूरी सख्ती बरती जा रही है वहीं दूसरी तरफ रेत माफिया के साथ सांठगांठ करने वाले एक बड़े नेता के बेटे की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। जिला होशियारपुर के हल्का शाम चौरासी से संबंधित बड़े नेता के बेटे द्वारा रेत माफिया के साथ सांठगांठ करके काम करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। जिसके चलते सरकार की रेत माफिया पर नकेल कसने की योजनाओं पर ग्रहण सा लगता नजर आने लगा है। एक तरफ जहां राणा गुरजीत रेत मामले में घिरे हुए हैं तो वहीं शाम चौरासी से संबंधित यह बड़े नेता का बेटा यह कहते हुए कि ‘अब सरकार (बारी) हमारी है’ रेत का काम करने को लेकर कुछ अधिक ही उत्सुक दिखाई दे रहा है। जिसे लेकर वह इलाके के रेत माफिया के साथ कई गुप्त बैठके भी कर चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार अन्य इलाकों के साथ-साथ शाम चौरासी इलाके में भी रेत माफिया काफी सक्रिय रहा है और मौजूदा समय में भी रेत माफिया द्वारा अपने मनसूबों को अंजाम


दिए जाने के समाचार प्राप्त होते रहते हैं। खनन के माध्यम से रातो-रात पैसा कमाने और और अमीर होने का ख्वाब देखने वाले नेता जी के बेटे ने रेत पर कब्जा करने की लगभग हर प्रकार की योजना बना रखी है तथा यह भी पता चला है कि रेत माफिया पर शिकंजा कसने वाले प्रशासन को किस प्रकार टैगल करना है यह भी उसने चुटकी बजाते ही सोच रखा है, क्योंकि जब सरकार ही अपनी है तो किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की क्या मजाल की नेता जी के बेटे को रोकने की हिम्मत दिखाये।
इलाके का भ्रमण करने पर पता चला है कि नेता जी का बेटा बड़े गर्व और रौब से यह कहता है कि अब डरने की क्या बात है जब सत्ता में सरकार हमारी है तो भाई बहुत खा लिया खाने वालों ने, अब तो बारी हमारी है। जैसे हम चाहेंगे काम होगा, नहीं तो कोई और भी काम नहीं कर सकता। पिछला अकाली-भाजपा सरकार के समय में अवैध खनन जिस तेजी के साथ बढ़ा था उसे लेकर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी और उनकी हार में अवैध खनन के मामले का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है। कांग्रेस हाईकमान भले ही सिस्टम में सुधार की बात करती हो, मगर राणा गुरजीत का मामला सामने आने के बाद जहां पूरे पंजाब में हरेक नेता व उसके रिश्तेदारों को पैर फूंक-फूंक कर रखना चाहिए था तो इसके विपरीत शाम चौरासी हल्के के ‘बड़े नेता जी के बेटा जी’ की रेत माफिया से चल रही सांठगांठ की चर्चाओं ने सरकार व इसके नेताओं के इरादों के साफ करना शुरु कर दिया है। पहले से ही कई प्रकार के सवालों का सामना करना रही कांग्रेस सरकार के समक्ष जल्द ही एक और सवाल खड़ा होने वाला है कि क्या सरकार सिर्फ इसलिए बनाई जाती है कि अवैध काम हो सकें और उन्हें रोकने वाले का तबादला करवा दिया जाए या उसे चुप रहने की नसीहत की जाए। अगर यही हालात रहे तो आने वाले समय में राजनीतिक पार्टियों से जनता का विश्वास उठ जाएगा की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।













