
मुकेरियां (द स्टैलर न्यूज़)। आप नेता एडवोकेट बलजीत सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें उन्होंने ने संबोधित करते हुए कहा कि पीटीसी चैनल से गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र श्लोकों को अन्य चैनलों पर प्रसारित करने की धारा को सिख गुरुद्वारा एक्ट में लाना मुख्यमंत्री का सराहनीय कदम है। लेकिन बादलों के हाथ चढ़े एसजीपीसी अध्यक्ष द्वारा किया गया विरोध पूरी तरह से गलत है और यह बात सिख समुदाय को बेहतर पता होनी चाहिए।

जब पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष ने पांच प्यारों को बर्खास्त किया और उनकी निंदा की तो एसजीपीसी सदस्य चुप रहे और जब पिछली सरकारों के दौरान सिख संगत पर गोलियां चलाई गईं तो एसजीपीसी ने उस समय की सरकार के खिलाफ कोई बैठक नहीं की और जब बादल सिख विरोधी मामलों में नामित हुए तो एसजीपीसी अध्यक्ष ने बैठक बुलाकर प्रकाश सिंह बादल की फखरे-ए-कौम को वापस नहीं मांगते। इन बातों से साफ है कि जब बादल सरकार से बाहर होते हैं तो एसजीपीसी बादलों के इशारे पर अपनी खोई हुई राजनीति को पुनर्जीवित करने की कोशिश करती है लेकिन जिन पर एसजीपीसी की जिम्मेदारी है उनके प्रति कुछ नहीं करती।
उन्होंने देश के राष्ट्रपति से मांग की कि एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल को सिख धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ अपने नाम के बाद सिंह के साथ जातियां लिखी जो कि गुरु के सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है, इन्हें सिख धर्म के विपरीत चलने के कारण देश के राष्ट्रपति को उन्हें उनके पदों से हटा देना चाहिए, ताकि एसजीपीसी में गुरु साहिबों के समानता के सिद्धांतों को फिर से पुनर्जीवित किया जा सके। इस मौके कैप्टन हरबंस सिंह, कैप्टन सोहन सिंह, किरणजीत सिंह के अतिरिक्त अन्य उपस्थित थे।












