अकालियों-कांग्रेसियों को ले बैठा था माइनिंग का मुद्दाः अब ‘आप’की बारी… मनी-मनी के हमाम में सब नंगे

पंजाब में अवैध माइनिंग एक एेसा मुद्दा रहा है, जिसने पिछली सरकारों के कई मंत्रियों एवं नेताओं की फजीहत करवाई तथा कई नेता इस धंधे से जुड़कर खूब मालमाल हुए। लेकिन वह माल बटौरने में तो लगे रहे, पर जनता की नाराजगी को समझ नहीं पाए तथा उन्हें सत्ता से हाथ धोने पड़ गया। भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन के दावे करके सत्ता में आई आम आदमी पार्टी के लिए भी अवैध माइनिंग को रोकना खाला जी के बाड़े से कम नहीं हैं। क्योंकि जिस काम में सरकारी ताकत इनवोल्व हो जाती है वहां सुधार की उम्मीद रखना बेमाइने होगा।

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आपको बता दें कि भले ही मुख्यमंत्री भगवंत मान पूरी ईमानदारी से सरकार चलाने के दावे करते नहीं थक रहे तो दूसरी तरफ उनके कुछ सिपासलार एेसे हैं जिन्हें शायद मुख्यमंत्री व सरकार की साख से कोई लेना देना नहीं है। उनके द्वारा इतनी सफाई के साथ सारा खेल खेला जा रहा है कि कुछ भी नाम पर न होकर सबकुछ डकार रहे हैं। बातों को न घुमाते हुए सीधी बात करते हैं। मामला यह है कि इन दिनों आम आदमी पार्टी से जुड़े दो नेता खासे चर्चाओं में हैं तथा इनमें एक तो साधारण सा विधायक है तो दूसरा अच्छी खासी पोस्ट पर सत्ता आसीन होकर सरकारी ताकत से तिजौरियां भरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा।

होशियारपुर की बात करें तो गढ़शंकर बीत से लेकर तलवाड़ा हाजीपुर के कंडी इलाके में वैध व अवैध माइनिंग का मुद्दा सदा ही चर्चाओं में रहा है तथा यह इलाका अवैध माइनिंग से जुड़े लोगों के लिए सदैव ही जैकपाट रहा है। यहां तक कि अवैध माइनिंग के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक आम आदमी पार्टी के नेता पर जानलेवा हमला भी हुआ तथा आज सरकार आने के बाद भी उन्हें न्याय तक नहीं मिला। क्योंकि अवैध माइनिंग के हमाम में सभी नंगे दिखाई दे रहे हैं, अन्यथा ईमानदार सरकार के कार्यकाल में अवैध माइनिंग. . .।

अवैध माइनिंग की एक छोटी सी उदाहरण आपके सामने पेश कर रहा हूं। जिले में एक क्रेशर खोला गया, जो शायद पिछली कांग्रेस सरकार के समय की बात है। अब नियमों को धत्ता बताकर खोले गए क्रैशर को चलाने के लिए सरकारी आशीर्वाद की जरुरत थी तो तत्कालीन विधायक साहिब से 7 दमड़े प्रतिमाह के हिसाब से रेट तय हुआ और क्रैशर चलने लगा। अब सरकार बदल गई तो भाई नए विधायक जी को भी तो पैसा चाहिए था, क्योंकि एक तो चुनाव पर खर्च हुआ और दूसरा पार्टी फंड व बड़े नेताओं पर खर्च आदि इतना हो जाता है कि नेता कितना भी धनाड्य क्यों न हो, खाली हो ही जाता है तथा उसका पहला लक्ष्य अपनी जेब भरना ही होता है। अब सत्ता परिवर्तन के बाद स्वभाविक सी बात थी कि अगर क्रैशर चलाना है तो उनकी शरण में जाए बिना कैसे संभव था। सो बात 10 दमड़े तक जा पहुंची। अब वह ही नहीं एेसे कई क्रैशर हैं जो दिन रात नियमों के विपरीत लोगों की नींद हराम तो कर ही रहे हैं साथ ही सड़कों पर चलना भी दूभर बना हुआ है।

दूसरी तरफ माइनिंग से जुड़े कई लोगों द्वारा बड़े नेता जी से संपर्क साधा गया तो उन्होंने रेत व मिट्टी ढोने वाले वाहनों के माध्यम से अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। क्योंकि अगर डायरैक्टर एंट्री हो जाती तो शायद भ्रष्टाचार मुक्त दावों की हवा निकल जाती, सो उन्होंने बड़ी चतुराई के साथ टिप्परों में हिस्सा डलवा लिया तथा अपने नाम पर काम न करके किसी दूसरे के नाम पर अवैध धंधा चलाकर खूब चांदी, अरे चांदी के दिन गए, अब तो हीरे मोती और सोना हा सोना बटौरा जा रहा है। इतनी चतुराई के साथ सारा धंधा चल रहा है कि साथ काम करने वालों को भी इसकी भनक नहीं और जनता के बीच अक्स भी ईमानदारी वाला बना हुआ है।

आप के कनवीनर व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों कथित शराब घोटाले में जेल में बंद हैं और सारी पार्टी हाए तौबा करके जनता के बीच उनके अक्स को ईमानदारी और क्रांतिकारी वाला साबित करने पर तुली हुई है। मामला अदालत में होने के चलते यह कहना सही नहीं होगा कि इस मामले की सच्चाई क्या है और अंजाम क्या होगा। परन्तु दूसरों को जेल में डालने की बातें करने वाले कितनी चतुराई से सारा खेल, खेलकर जनता, जनता नहीं पंजाबियों को लूट रहे हैं, अगर इस सारे प्रक्रण की गहनता से जांच हो जाए तो दूध का दूध पानी का पानी होने से कोई नहीं रोक सकेगा। पर सवाल यह है कि दूसरों को आईना दिखाने वालों को आईना कौन दिखाएगा, क्योंकि जो यह हिम्मत करता है उसे तो कानूनी दांव पेंच में एेसा फंदा दिया जाता है कि वो बेचारा घर से निकलते हुए भी डरने लगता है।

क्या, क्या नाम हैं और किस हलके के विधायक हैं के नाम तो बता दो। अरे भाई आपने ऊपर वाली लाइन पढ़ी नहीं क्या। छोटा सा पत्रकार हूं, जैसे तैसे जीविका चला रहा हूं। आपको मैं अच्छा नहीं लगता है क्या। मुझे पता है कि आप इतने तो समझदार हैं कि सारी बात समझ भी गए होंगे, बस मेरे मुंह से सुनना चाहते हैं। पर आपको तो पता ही है, चुटकी में नाम नहीं इशारा ही होता है। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।

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