
कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया। 29 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में बुधवार को इस्कान कपूरथला की ओर से 19वी संध्या फ़ेरी पुरानी दाना मंडी में बड़े हर्षो उल्लास के साथ निकाली गई। जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। लोगो मे भगवान की रथ यात्रा प्रति उत्साह दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। सभी शहर निवासी बड़ी हि उत्सुक्ता के साथ रथ यात्रा का इंतज़ार कर रहे हैँ। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। मंडी निवासिओं ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। ये हरिनाम संध्या फेरी श्री रोहित अग्रवाल, बिंदु अग्रवाल जी के निवास स्थान से बड़ी धूम धाम से आरम्भ हुई और समाप्ति आरती दाना मंडी मैन ही श्री पवन कुमार गुप्ता जी, रघुनंदन गुप्ता जी के निवास स्थान पर जाकर हुई। यहाँ संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) जी ने दाना मंडी के भक्तों का धन्यवाद करते हुए कहा की, मंडी के सभी भक्त भगवान् की इतनी अधिक सेवा इसलिए करते हैँ क्योकि इन के हृदय में भगवान् श्री कृष्ण के लिए अथाह प्रेम है। और यह प्रेम इन के हृदय में आया कहाँ से, क्योंकि पिछले कई दशकों से दाना मंडी मंदिर में लोगों को श्रीमद भगवदगीता पढ़ाई जाती है। भगवदगीता श्रवन करने और पड़ने से किसी के भी हृदय में भगवान के प्रति प्रेम पैदा किया जा सकता है। भगवदगीता हमें बताती है की भगवान् हैँ कोन और किस प्रकार से हमें उनकी सेवा करनी है।

आगे भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए प्रभुजी जी ने बताया की रथ यात्रा के दौरान हमने केवल खाते पीते ही नहीं रहना, अपना पुरा ध्यान हमने भगवान् के रथ मे रस्से को खींचने में लगाना है। जिस प्रकार रथ यात्रा के दौरान हमारे रास्ते में बहुत से प्रलोभन आएंगे उसी प्रकार हमारी भक्ति के रास्ते में भी बहुत से प्रलोभन आते हैँ। हमे करना क्या है अपनी भक्ति को उन प्रलोभनों के कारण रोकना नहीं है। बल्कि जो भी हमारे जीवन में हमे मिलता है उसे केवल भगवान् की सेवा में लगाना है। यही असली कृष्णभावनामृत है। वैसे भी इस संसार में जो कुछ है वो भगवान् का हि तो है, और हम सब उनके दास हैँ, तो मालिक की चीज मालिक को वापिस करने में केसा संकोच। यादी हम कोई वस्तु उसके मालिक के बिना पूछे इस्तेमाल करते हैँ तो हम चोर कहलाते हैँ। इसी प्रकार यादी भगवान् का दिया हुआ हम भगवान को अर्पण किये बिना इस्तमाल करते हैँ तो हम सब भी चोर हि कहलाएं गे। एक भक्त के जीवन में यदी कुछ प्रलोभन आतें भी हैँ तो वह केवल उसकी परीक्षा लेने के लिए आते हैँ और हमने उस परीक्षा में फैल नहीं होना। हमने किसी भी हालात में भक्ति के पथ को नहीं छोड़ना क्योंकि केवल भक्ति के द्वारा हि हम भगवान् को जान सकते हैँ, भगवान को पा सकते हैँ।
परन्तु हमे भक्ति है क्या यह कैसे पता चलेगा? भक्ति के बारे में हमे केवल भगवदगीता से पता चल सकता है। कहने का तात्पर्य है की अगर हम भगवान कृष्ण के किसी भक्त से उनकी लीलाओ ओर उनके गुणों के बारे मे श्रवण करेगे तभी हमारे हृदय में भगवान् के प्रति प्रेम उत्पन्न हो सकता है ओर कीर्तन के द्वारा हम भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर सकते हैं। हमें भगवान् श्री कृष्ण से यही प्रार्थना करनी चाहिए की भगवान् आपने तो पतीतों का उधार करने के लिए अवतार लिया है और इस संसार में मुझ से अधिक पतीत कोई नहीं है। आप कब मेरा उधार करोगे। भगवान् तो भाव ग्रही हैँ जब हम भी पूरे शुद्ध भाव से भगवान् को हरिनाम के द्वारा पुकारें गे तो भगवान् आवश्य हमारे हृदय में भी प्रवेश करेगे। प्रभु जी ने कहा की लोग बहुत उत्साह के साथ हरिनाम फेरिओं मे आ रहे है। भगवान के नाम का कीर्तन कर रहे हैँ ओर भगवान् की प्रसन्नता के लिए नृत्य कर रहे हैँ। उलेखनीय है की 29 जून को शाम 5 बजे प्राचीन श्री रानी साहिबा मंदिर से, सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। सभी शहर निवासी रथ यात्रा में शामिल हो कर अपने जीवन को सफल बनाएं।











