
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भाजपा की वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा है कि किसी जमाने में कभी साहित्यकार सभी शाहजहां के प्रेम के प्रतीक ताजमहल की तारीफ करते थे और अधिकतर विचारक, साहित्यकार, आलोचक लिखते थे कि ताजमहल गरीबों के प्रेम का उपहास। अब भारत में एक शाही शादी की जो चर्चा हो रही है, टीवी के लगभग सभी चैनल शादी के पहले भी जितने फंग्शन हुए, उसे दिखाने में ही अपने को धन्य मानते हैं। प्रधानमंत्री समेत सभी उसी महंगी शादी में शामिल होते हैं। समाजवादी पार्टी भी परिवार सहित जाती है और लालू यादव भी, वहां नाचते भी हैं।

उन्होंने कहा कि कल तक इन उद्योगपतियों का विरोध करने वाले उनके घर की मीठी मिठाई और शान शौकत का आनंद लेते हैं। यह ठीक है कि विवाह शादी में बराबर के दोस्त मित्र, रिश्तेदार बलाए जाते है, उनको जाना भी चाहिए, पर उस महंगी शादी का जो प्रदर्शन हुआ, टीवी चैनलों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी वह भी गरीब की बेटी की शादी का उपहास है। जैसे ताजमहल गरीब के प्रेम का उपहास कहा जाता था।
किसी समय बड़े लोगों के सादे ढंग से विवाह शादी करने की चर्चा होती थी। बुराइयों के विरुद्ध आदर्श कहा जाता था। अब क्या कहेंगे। क्या गरीब की बेटी अपनी शादी में ऐसी धूमधाम नहीं मांगेगी। क्या करेंगे गरीब मां बाप?
लक्ष्मीकांता चावला












