
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत के सुप्रीम कोर्ट और ईश्वर का धन्यवाद कि देश में डाक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई। कितना आश्चर्य है कि बंगाल की एक डाक्टर के साथ अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध केवल सरकारी अस्पतालों में हड़ताल हुई, प्राइवेट में नहीं। इसका सीधा अर्थ यह निकला कि जो लोग मोटा धन खर्च कर सकते हैं उनके लिए तो इलाज की सुविधा रही, पर जो गरीब सरकारी अस्पतालों के भरोसे हैं उनको बिना इलाज के लिए ही इधर उधर धक्के खाने पड़े। अभी तक कोई भी सरकार यह नहीं बता सकी कि हड़ताल के कारण किसी मरीज का जीवन तो नहीं गया। मुझे यह आश्चर्य है कि अब पंजाब में भी 48 घंटों में बलात्कार की तीन घटनाएं हो गईंं। उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, चेन्नई, राजस्थान, केरल आदि में भी कम से कम डेढ़ दर्जन घटनाएं अगस्त मास में हुईं।

अभी अगस्त के आठ दिन बाकी हैं। मेरा अपने समाज से विशेषकर डाक्टर वर्ग से यह प्रश्न है कि उन अभागी लड़कियों के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई जाती जिनमें नर्स भी है, तीन वर्ष की मासूम बच्ची भी हैं, दस वर्ष की मासूम भी है और कई दुखद घटनाएं हैं। भारत सरकार से यह निवेदन है कि एक तो वह यह आंकड़े जारी करें कि इस हड़ताल के दौरान कोई जीवन हानि तो नहीं हुई, अगर हुई है तो कितने लोग जीवन से हाथ धो बैठे और भारत सरकार यह भी बताए कि समाज के इस कामुक आपराधिक मानसिकता को रोकने के लिए कोई विशेष अभियान चलाया जा रहा है या नहीं, क्योंकि केवल डंडे से समाज का सुधार नहीं हो सकता।












