
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत की जनता की अपने सभी शंकराचार्यों, मठों के प्रमुख संतों और धार्मिक जनों से अपील है कि वे सनातन धर्म को दिशा निर्देश देने के लिए और सनातन धर्मियों पर कोई पूजा पद्धति व्रत आदि का नियंत्रण निर्देश देने के लिए एक ऐसा अखिल भारतीय बोर्ड अवश्य बनाएं जिससे पूरे देश के सनातन धर्मावलंबी एक रास्ते पर चलें। उनका रहन सहन, खान पान सही दिशा में हो, जैसा सनातनी वैष्णव का होना चाहिए। अफसोस की बात है कि बहुत से अपने आप को वैष्णव कहलाने वाले और समाज को दिशा देने वाले स्वयं नहीं जानते कि सनातन धर्मी और वैष्णव का जीवन कैसा होना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण जी ने तो गीता में कह दिया कि जो मांस मदिरा आदि लेता है वह तामसी भोजन है और तामसी भोजन देने वाले को कभी ब्रह्म की प्राप्ति नहीं हो सकती। फिर भी दुख की बात है कि देश के अनेक प्रमुख मंदिरों के प्रबंधक भी वैष्णव जीवन पद्धति से बहुत दूर हैं, इसलिए आज की आवश्यकता यह है कि हमारे शंकराचार्य नियंत्रण करें। एक आवाज से सारे वैष्णव मतावलंबियों को वह सही रास्ता दिखाएं और ऐसा न हो कि जो लोग वैष्णव जीवन पद्धति से बिल्कुल विमुख हैं, वैष्णव परंपराओं को तोड़कर भी मंदिरों के मुखिया बने हैं उनसे हमारे मंदिरों को मुक्ति मिल सके, अन्यथा जनता भी सही रास्ते में नहीं चलेगी। आज दुनिया में सनातन का झंडा फहरा रहा है, लेकिन सनातन परंपरा क्या है यह अधिकतर लोग नहीं जानते। हमारे धर्म गुरु सनातन परंपरा से जनता को परिचित करवाएं।











