Monday, October 19, 2026
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जल से शरीर की शुद्धि और सच्चाई से होती है मन की शुद्धिः आचार्य चंद्र मोहन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में रविवार के प्रवचन के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे दुख दूर करें |लेकिन इसके लिए हम प्रयास नहीं करते और इसीलिए मनुष्य दुखी रहते है |

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उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण यह है कि हम गलत मार्ग पर चलते हैं और प्रभु के मार्ग को पूरी तरह से भुला देते हैं| उन्होंने कहा कि प्रभु रामलाल जी भी योग को इसलिए लाए ताकि हम सही रास्ते पर चल सके|  आज चाहे पहले के मुकाबले सुख के अधिक साधन है लेकिन फिर भी हम सही मार्ग पर नहीं चल रहे |अगर हम लोग व परलोक में सुखी रहना चाहते हैं तो हमें योग के मार्ग पर चलना होगा |संसार में सुखी रहने के लिए शरीर व मन का सुखी होना जरूरी है |जब इन दोनों में से कोई एक दुखी होता है तो हम दुखी होते हैं |

आज शरीर को रोग लगे हुए हैं तथा मन में चिंता रहती है |शरीर का सुख स्वास्थ्य से संबंधित है| दुख इसलिए आता है क्योंकि हम शुद्ध नहीं रहते |जब शरीर में मल जम जाता है तो वह कई रोग पैदा करता है |योग के साधनों द्वारा इसे दूर किया जा सकता है| उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य को पैसों से नहीं खरीदा जा सकता |जल से शरीर की शुद्धि की जाती है| इसी तरह मन की शुद्धि सच्चाई से होती है| उन्होंने कहा कि योग के यम नियम सत्य अहिंसा प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधियों पर हम नहीं चलते |जो व्यक्ति सच पर नहीं चलेगा वह कभी भी सुखी नहीं रहेगा |जिसका शरीर व 

 मन सुखी होगा वह परलोक में भी सुखी होगा| पतंजलि ऋषि कहते हैं कि मन को शुद्ध करो| योग के अंगों पर चलो |तभी ज्ञान मिलेगा तथा मोक्ष की प्राप्ति होगी| जब मन शुद्ध होगा तो ध्यान भी लगेगा और हम अपनी मंजिल को भी प्राप्त कर लेंगे 

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