
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। चुनाव जब भी नजदीक आते हैं जैसे कि अब पंजाब में नगर निगम के चुनाव आ गए हैं तो सभी नेता अमृतसर को तथा अन्य कुछ शहरों को पवित्र घोषित करने की मांग करते हैं। हमारी तो धरती का एक एक कण पवित्र है। यह शहीदों के खून से सिंचित धरती है। संतों, महापुरुषों की धरती है। वेद जहां से रचे गए और दुनिया को सबसे पहले संस्कृत ग्रंथ दिया गया यह वही धरती है। जो लोग केवल अमृतसर को या कुछ और शहरों को पवित्र बनाने की मांग करते हैं वे बताएं कि शराब और मांस, बीड़ी और हुक्का बंद करवा लें यह तो अच्छी बात है, पर क्या वे चुनाव बिना शराब के लड़ेंगे। क्या पूरे देश में बूचड़खाने बंद करवाएंगे? क्या शराब पीने वालों और मीट खाने वालों को अपने मंदिर गुरुद्वारों से बाहर कर देंगे?

रिश्वतखोरों का क्या करेंगे? रिश्वतखोर भ्ज्ञी तो देश को पंजाब को, अमृतसर को अपवित्र बनाते हैं और जहां देश में पंजाब में प्रतिदिन किसी न किसी लड़की को बलात्कार जैसे अत्याचार का सामना करना पड़ता है जहां बुजुर्ग माता-पिता घरों से बाहर निकालकर वृद्धाश्रमों में या धक्के खाने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। जब तक इसे नहीं रोकेंगे तब तक कैसी पवित्रता? मुझे ऐसा लगता है शहरों को पवित्र बनाने की बात भी अब एक चुनावी नारा हो गया। मेरी तो ईश्वर से यह प्रार्थना है और भारत सरकार ेस भी कि पूरे देश में इस अपवित्रता को दूर करवाएं और जो भी अगले चुनाव देश में कहीं भी आने वाले हैं वे बिना शराब और नोटों के बिना संपन्न करवाएं। पवित्रता के नाम पर केवल नारे लगाने और मार्च निकालने से कुछ नहीं होने वाला।












