
कुछ दिन पहले हमने आपको बताया था कि जल्द ही वन विभाग के एक बड़े अधिकारी की धांधलियों का पर्दाफाश किया जाएगा। हमारी तहकीकात उस संबंध में चल रही है तथा जल्द ही आपको उसका नाम और उसने कितनी धांधलियां की हैं, सब कुछ आपके समक्ष होगा। हालांकि उसे अधिकारी द्वारा विभाग के भीतर चल रही जांच को अपने पद और राजनीतिक पहुंच से बुरी तरह से प्रभावित भी किया जा रहा है। लेकिन कुछेक ईमानदार कर्मचारियों के कारण अधिकारी के प्रयास पूरी तरह से फलीभूत नहीं हो रहे। जिस कारण वह कुछ परेशान भी चल रहा है। लेकिन पद प्रतिष्ठा और पावर के नशे में चूर अधिकारी पूरी तरह से आश्वस्त है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जबकि वह यह भूल गया है कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती और वह एक दिन गलत काम करने वाले पर पड़ती जरुर है। भले ही उसमें थोड़ा वक्त जरुर लग सकता है। मगर, एक दिन सच्चाई आप सब के सामने होगी।

स्टैलर चुटकी
इन दिनों अधिकारी काफी चर्चा में है और उसकी चर्चा में आने का कारण कई ऐसे प्रोजैक्ट हैं, जो देखने में तो जनता के लिए बनाए गए हैं, लेकिन उसके पीछे छिपी सच्चाई एवं भ्रष्टाचार की परतें अगर खुलने लगें तो आप हैरान हो जाएंगे कि तिजौरी भरने के लिए ताकत का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाता है और उसे करने के लिए बड़े राजनेताओं को कैसे खुश रखा जाता है, जिसमें वह खूब माहिर है। इसलिए तो पंजाब सरकार के एक बड़े नेता जब वन विभाग के किसी गैस्ट हाउस में जाते हैं तो जनाब खुद महंगी से महंगी लेकर पहुंचते हैं। मुंह के इतने मीठे कि आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि उसने तो हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और, की कहावत को भी फेल कर दिया है।
जनता के मनोरंजन एवं उन्हें प्राकृति के साथ जोड़ने के लिए वन विभाग द्वारा कुछ समय पहले ही कुछ प्रोजैक्ट लगाए गए थे तथा इस दौरान कुछेक स्थानों पर हटें आदि का निर्माण भी करवाया गया। इन दिनों वन विभाग में एक कहावत काफी चर्चित है कि जैसे-जैसे हटें बनती गईं, ऊधर साहब का फर्श पक्का होता गया। अब यह कौन सा फर्श पक्का होता गया, इस बारे में तो आप समझ ही गए होंगे। वैसे एक बात है जब पढ़लिखकर कोई व्यक्ति कुछ बन जाता है और ऐसे पद पर पहुंच जाता है कि उसे कोई पूछने वाला ही न हो और ऊपर से बड़े राजनीतिक आकाओं का आशीर्वाद मिल जाए तो सोने पे सोहागे वाली बात हो जाती है। बस उसी शान और शक्ति के नशे में चूर यह अधिकारी जैसा कि हमने बताया कि मुंह का इतना मीठा है कि मानो एक पल में तो आप उसी के होकर रह जाएं।
परन्तु उसके भीतर छिपे भ्रष्टाचारी चेहरो को देखने के बाद आपकी सारी राय ही बदल जाएगी। वैसे एक बात है अगर किसी विभाग में बड़े प्रोजैक्ट ही न बनाए जाएं तो मलाई खाने का मजा ही नहीं आता। और ऊपर से सब कुछ अपने हाथ में हो तो चिट भी अपनी और पट भी। जी सर जी सर कहता हूं, मजे में रहता हूं, की कहावत को चरितार्थ करता हुआ यह अधिकारी अपने पद का खूब आनंद ले रहा है। विभाग में चर्चा है कि एक सीट पर कोई बड़ा अधिकारी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता। उसे देर तक टिकने के लिए तिकड़म भिड़ानी पड़ती है, यानि कि बड़े राजनीतिक आकाओं की छत्रछाया के नीचे रहना पड़ता है तथा इस छत्रछाया में बने रहने में माहिर इस अधिकारी के कई किस्से एक-एक करके चर्चा में आ रहे हैं।
भाई साहब ने कौन-कौन सी धांधलियां की इस बारे में हम जल्द ही आपको बताएंगे तथा उसमें इसका नाम भी उजागर करेंगे। क्या अभी बता दूं… नहीं सर इतनी जल्दी न करें। यह खबर पढ़कर वह जरुर कुछ न कुछ करेगा और वह खुद बताएगा कि जिसकगे बारे में खबर लिखी थी वही है। तब तो आपको पता चल ही जाएगा। अगर आपको इस बात पर भी भरोसा नहीं तो हम आपको कह रहे हैं कि थोड़े दिन रुक जाएं, सारा मामला आपके सामने होगा और हम उस अधिकारी का पक्ष भी रखेंगे कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया और किसकी शह पर किया तथा किसको कैसे खुश रखा। तब तक के लिए इजाजत दें। जय राम जी की।












