Sunday, October 25, 2026
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बुजुर्गों के साथ समय बिताएं, घर में खुशियों और संस्कारों का माहौल बनाएं : संजीव अरोड़ा

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति अपने कामकाज और जिम्मेदारियों में इतना व्यस्त हो गया है कि परिवार के बुजुर्गों के साथ बैठने और समय बिताने के लिए भी समय नहीं निकाल पाता। यह चिंता का विषय है, क्योंकि बुजुर्ग परिवार की धरोहर होते हैं। उनके अनुभव, संस्कार और जीवन से मिली सीख नई पीढ़ी के लिए अनमोल खजाना हैं। यह विचार भारत विकास परिषद के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने व्यक्त किए।

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संजीव अरोड़ा ने कहा कि परिवार में रह रहे बुजुर्गों को केवल भोजन, दवाइयों और अन्य सुविधाओं की ही जरूरत नहीं होती, बल्कि उन्हें अपनों के साथ, प्यार, सम्मान और बातचीत की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। जब बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य उनके पास बैठते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और उनके साथ भोजन करते हैं, तो उन्हें अपनापन और खुशी का एहसास होता है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को समय देना केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अच्छे संस्कार देने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बच्चे वही सीखते हैं, जो वे अपने घर में होते हुए देखते हैं। यदि वे अपने माता-पिता और दादा-दादी को घर के बुजुर्गों का सम्मान करते, उनकी सेवा करते और उनके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करते देखेंगे, तो भविष्य में वे भी अपने बड़ों के साथ इसी प्रकार के रिश्ते बनाए रखेंगे।

संजीव अरोड़ा ने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों को प्रतिदिन कुछ समय ऐसा जरूर निकालना चाहिए, जब मोबाइल फोन और दूसरे कामों को एक तरफ रखकर सभी एक साथ बैठें, अपने दिनभर के अनुभव साझा करें और बुजुर्गों के साथ भोजन करें। इस छोटी-सी पहल से घर में प्रेम, आपसी समझ और खुशियों का माहौल बन सकता है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के साथ बातचीत करना, उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करवाना उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हो सकता है। एक खुशहाल परिवार वही है, जहां हर पीढ़ी को सम्मान मिले और रिश्तों में अपनापन बना रहे।

संजीव अरोड़ा ने जनसाधारण से विशेष अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार आज से ही यह संकल्प ले कि वह अपने घर के बुजुर्गों के लिए प्रतिदिन कुछ समय अवश्य निकालेगा। अपने माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य बुजुर्गों के पास बैठें, उनकी बातें ध्यान से सुनें, उनके साथ भोजन करें और उन्हें यह एहसास करवाएं कि वे परिवार के लिए अनमोल हैं। साथ ही, बच्चों को भी बचपन से ही बड़ों का सम्मान करने और उनके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करने की शिक्षा दें।

उन्होंने कहा कि आइए, हम सब मिलकर ऐसी पारिवारिक संस्कृति को मजबूत बनाएं, जहां बुजुर्ग अकेलापन महसूस न करें और हर पीढ़ी के बीच प्रेम, सम्मान तथा अपनत्व का रिश्ता बना रहे। याद रखें, बुजुर्गों को हमारा थोड़ा-सा समय उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है और हमारे बच्चों को जीवनभर के लिए अच्छे संस्कार दे सकता है। बुजुर्गों का सम्मान करें, उन्हें समय दें और अपने घर को खुशियों से भर दें।

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