
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रजनीश शर्मा। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणीदेवी में उस समय उत्साह का वातावरण था जब प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा एवं शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता संजय कुमार का विद्यालय वापसी पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समस्त स्टाफ, छात्र-छात्राओं तथा पाठशाला प्रबंधन समिति के सदस्यों ने फूलमालाओं, तालियों और आत्मीयता से उनका अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रधानाचार्यों का एक प्रतिनिधिमंडल 14 से 19 अप्रैल 2025 तक सिंगापुर के शैक्षणिक संस्थानों के अध्ययन दौरे पर भेजा गया। यह यात्रा “सिंगापुर एक्सपोज़र विजिट” नामक एक विशेष पहल के अंतर्गत आयोजित की गई थी। इस प्रतिनिधिमंडल में जिला हमीरपुर की ओर से टौणीदेवी स्कूल के प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा और शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता संजय कुमार को शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य शिक्षकों को वैश्विक शिक्षा प्रणालियों, अत्याधुनिक शिक्षण विधियों और कौशल-आधारित शिक्षा की बारीकियों से परिचित कराना था ताकि वे प्रदेश के स्कूलों में नवाचार और गुणवत्ता के नए प्रतिमान स्थापित कर सकें।

प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर की प्रतिष्ठित प्रिंसिपल्स अकादमी, सिंगापुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। वहाँ उन्हें “कक्षा में शिक्षण और सीखने पर प्रभाव” एवं “पूछताछ और समस्या-आधारित शिक्षा के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा में छात्रों को शामिल करना” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। ये सत्र अत्यंत प्रभावशाली रहे, जिनमें शिक्षकों को यह बताया गया कि कैसे कक्षा को एक संवादात्मक, खोजपूर्ण और व्यावसायिक वातावरण में बदला जा सकता है। विद्यालय वापसी पर आयोजित एक विशेष सत्र में प्रधानाचार्य रांगड़ा और प्रवक्ता संजय कुमार ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सिंगापुर की शिक्षा प्रणाली विद्यार्थी-केंद्रित है, जहाँ शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और नवाचार के संवाहक होते हैं। वहाँ प्रत्येक शिक्षक के लिए नियमित प्रशिक्षण, निरीक्षण, और स्वयं मूल्यांकन की व्यवस्थित प्रणाली है जिससे उनका पेशेवर विकास निरंतर होता रहता है। आधुनिक शिक्षा में सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि जीवन कौशल, नैतिकता और रचनात्मकता का भी उतना ही महत्त्व है। उन्होंने बच्चों को बताया कि कैसे सिंगापुर के छात्र सिर्फ अंकों की दौड़ में नहीं भागते, बल्कि समाज के उपयोगी और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता श्री संजय कुमार ने बताया कि सिंगापुर में पूछताछ आधारित अधिगम और समस्या आधारित अधिगम जैसी शिक्षण विधियाँ बहुत प्रभावी रूप से अपनाई जाती हैं। विद्यार्थियों को रटने के बजाय सोचने, विश्लेषण करने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाता है। समूह परियोजनाएँ, केस स्टडी, और वास्तविक जीवन की समस्याओं पर आधारित गतिविधियाँ सिखाने का मूल आधार हैं। वहाँ शिक्षकों को कक्षा के प्रत्येक छात्र के शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास की जिम्मेदारी दी जाती है। विद्यालयों में एक जीवंत और अनुशासित वातावरण होता है, जिसमें नवाचार, आत्म-अनुशासन और सहयोग पर बल दिया जाता है। छात्रों की सीखने की गति, रुचि और क्षमता के अनुसार उन्हें गाइड किया जाता है।प्रधानाचार्य ने आश्वासन दिया कि वे सिंगापुर से प्राप्त अनुभवों को विद्यालय स्तर पर लागू करने की पूरी कोशिश करेंगे।
विद्यालय में छात्र संवाद सत्र, सह-पाठ्य गतिविधियों में नवाचार तथा डिजिटल शिक्षण सामग्री के समावेश की योजनाएँ बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षकों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि सभी शिक्षक वैश्विक मानकों की समझ विकसित कर सकें। विद्यालय की प्रबंधन समिति ने सरकार और शिक्षा विभाग का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के शिक्षकों को वैश्विक मंच पर सीखने और बढ़ने का अवसर प्रदान किया। “सिंगापुर एक्सपोज़र विजिट” न केवल एक विदेश यात्रा थी, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में नवाचार की एक मजबूत शुरुआत का प्रतीक भी है। इस पहल के माध्यम से शिक्षक न केवल अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मानकों से परिचित हुए बल्कि उन्होंने यह भी समझा कि सीखना एक सतत प्रक्रिया है जो सीमाओं से परे जाकर भी प्रेरणा देती है। साथ ही विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि सिंगापुर में साफ़-सफ़ाई और सार्वजनिक अनुशासन को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है।











