Monday, October 26, 2026
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आपातकाल के काले अध्याय को 50 वर्ष बाद भी भुला नहीं पाये भारतवासी: तीक्ष्ण सूद

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा है कि 25 जून भारतवर्ष में एक काले दिवस के तौर पर जाना जाता रहेगा, क्योंकि इसी  दिन 1975 में  पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के अपने खिलाफ आए निर्णय जिसमें उनके चुनाव को अवैध घोषित किया था से बचने के लिए असंविधानिक  के तरीके से आपातकाल लगाकर पूरे देश को कारागार में बदल दिया था। उन दिनों बाबू जयप्रकाश नारायण  का देश की  सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन भी चार्म  पर था। आपातकाल लगाकर गांधी ने उस आंदोलन की आवाज दबा दी थी। एक लाख से अधिक लोगों को 19 महीने जेलों में सड़ना पड़ा और उन्हें यह भी नहीं पता था कि कभी वह  इस काल कोठरी से बाहर भी आएंगे या नहीं। प्रेस व मीडिया पर सैंसर लगाकर संविधान के चौथे स्तंभ की आवाज भी कुचल दी गई  थी। 80 लाख से अधिक  लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करके तथा तुर्कमान गेट की इमारतों को गिरा कर श्रीमती गांधी  ने अपनी शासकीय क्रूरता  से देश में डर तथा भय का माहौल बना रखा था।

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जो भी  सरकार की आलोचना करता है करता उसे बिना कारण बताएं अनिश्चित समय के लिए नजर बंद कर दिया जाता। केवल कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता ही आजादी से अपनी पार्टी का काम  करने के लिए आजाद थे। सैकड़ों जाने चली गई थी। परंतु कोई भी पूछने वाला नहीं था। श्री सूद ने कहा कि ऐमरजेंसी लगाकर संविधान को तहस-नहस  करने वाली कांग्रेस आज पता नहीं किस मुंह से संविधान की रक्षा करने का ढोंग  रच रही है, जबकि असल  स्थिति यह है कि कांग्रेस के राज में ही डॉक्टर बी आर अंबेडकर के दिए गए संविधान का कांग्रेसियों ने चीर हरण किया था। परंतु मोदी सरकार में  सभी संवैधानिक संस्थाएं  बिना किसी भय  से अपना दायित्व निभा रही है। उन्होंने कहा कि 25 जून को भारत के इतिहास में सदा-सदा के लिए एक काले  दिवस के तौर पर देखा जाएगा तथा कांग्रेस द्वारा लगाई गई इमरजेंसी एक कला इतिहास बनेगा। आपातकाल के 50  वर्ष में इस काले अध्याय भुला  पाएगे।

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