
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। अमृतसर और पंजाब के कई शहरों में कभी हृदय योजना के नाम पर और अब स्मार्ट सिटी के नाम पर जो सरकारी खजाने का उपयोग हो रहा है न केंद्र सरकार और न ही केंद्र सरकार उसके लिए गंभीर है। जिस शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है उस शहर की जनता यह जानती ही नहीं कि सरकार हमें क्या देना चाहती है, जनता को कौन कौन सी सुविधाएं स्मार्ट सिटी में मिलेंगी, क्योंकि हृदय योजना में जो मिला था वह भी कागजों में रह गया। जनता को प्रत्यक्ष रूप से उसमें कोई लाभ नहीं हुआ। अब अमृतसर का ही उदाहरण ले लें अरबों रुपया स्मार्ट सिटी के नाम पर खर्च किया जा रहा है, लेकिन जो अमृतसर शहर है उसे पहले अमरिंदर सरकार और मान सरकार शायद शहर ही नहीं समझती। अमृतसर के बारह दरवाजों के अंदर जो पुराना शहर है, जिसमें ऐतिहासिक स्थान हैं, मंदिर हैं गुरुद्वारे हैं क्या वह शहर स्मार्ट बनाने के लिए कोई प्रयास या कोई योजना सरकार की है?

जरूरत तो यह है कि सबसे पहले अमृतसर के उन गली बाजारों को सुंदर, स्वच्छ बनाया जाए जो असली अमृतसर है। न वहां बाग बगीचे हैं, न सड़कों की मरम्मत है, न बिजली की तारें लगाने का कोई सही प्रबंध है और सरकार की तरफ से कोई भी सुविधा अमृतसर में रहने वालों को नहीं दी जा रही। क्या देशवासी यह विश्वास करेंगे कि यहां सारा सप्ताह सफाई नहीं होती। पांच या छह दिन होती है। अभी अभी इंदौर के मेयर अमृतसर होकर गए, पर सबसे स्वच्छ शहर के मेयर को असली अमृतसर दिखाया ही नहीं गया। सिविल लाइन एरिया में लंच डिनर देकर उनको विदा कर दिया है। सवाल अमृतसर निगम से नहीं, पंजाब सरकार से है कि स्मार्ट सिटी है क्या हमें बताया जाए और जो धन इसके लिए आया है उसे पहले ऐतिहासिक नगर पर खर्च किया जाए, उसके बाद सिविल लाइन












