
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-रजनीश शर्मा। हमीरपुर और मंडी जिला की सीमा पर स्थित लाखों रुपए की आय वाले आवाहदेवी मंदिर के सरकारीकरण को लेकर मांग उठना शुरू हो गई है। इसी संदर्भ में आवाहदेवी मंदिर बचाओ मंच का गठन किया गया है। मंच के सदस्य मंदिर को सरकार के अधीन लाने के लिए शीघ्र ही एसडीएम हमीरपुर से मिल मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की तैयारी कर रहे है। बुधवार को आवाहदेवी निवासी अजय कुमार पुत्र विचित्र सिंह, राजेश शर्मा पुत्र हरिचंद शर्मा तथा रामलोक ने बताया कि आवाहदेवी माता के प्रति लोगों की अपार श्रद्धा है।

यहां कांगड़ा, हमीरपुर और मंडी से सैंकड़ों श्रद्धालु आते हैं तथा माथा टेक भेंट चढ़ाते हैं। मंदिर की पूर्व कमेटी ने माता के गहने तक बैंक में गिरवी रख दिए। मंदिर के नाम पर ली गई जमीन भी विवादित है तथा विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपए का गोलमाल हुआ है। इन्होंने नई कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कमेटी द्वारा मंदिर में अत्यधिक स्टाफ और उनके वेतन को लेकर उंगलियां उठाई गई।
अजय कुमार ने कहा कि लाखों रुपए की आय वाली इस संस्था को सरकार अपने अधीन ले तो निष्पक्षता से विकास हो सकता है तथा श्रद्धालुओं का पैसा मंदिर में ही खर्च हो पाएगा। इसके अलावा यहां पुजारियों को भी सरंक्षण मिलेगा जिन्हें कमेटियां शोषित करती आई हैं। पुजारी राजेश शर्मा ने कहा है कि आवाहदेवी मंदिर का सरकार के अधीन लिया जाना बहुत जरूरी हो गया है। लोगों द्वारा दिए दान का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि अवाहदेवी मंदिर बचाओ मंच में दर्जनों लोग जुड़ रहे हैं और इस आवाज को सरकार तक पहुंचाएंगे। रामलोक के मुताबिक मंदिर का विकास तभी संभव है जब यहां की व्यवस्था सरकारी ट्रस्ट के अंडर होगी।
वहीं आवाजदेवी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रमेश गुलेरिया ने बताया कि पुरानी कमेटी के सभी छोटे मोटे विवाद सेटल कर लिए गए हैं। मंदिर कमेटी मंदिर के स्टाफ को अब केवल 1.11 लाख रुपए महीना सैलरी का बजट खर्च कर रही है जोकि पहले ज्यादा था। उन्होंने कहा कि कमेटी ने कभी मंदिर को सरकारी ट्रस्ट के अधीन करने की मांग नहीं की है। कमेटी का ऑडिट सीए द्वारा ही करवाया जाता है जिसमें किसी को कोई एतराज नहीं है।












