
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। जिसके बाद कोर्ट के फैसले पर लोगों द्वारा तालियां बजाई गई। यह फैसला महीनों लंबे ट्रायल के बाद आया, जिसमें अभियोजन पक्ष ने वायरल ऑडियो, गवाह और मानवाधिकार रिपोर्ट्स पेश कीं। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हसीना का वह ऑडियो जारी किया, जिसमें वे पुलिस प्रमुख से “लोगों पर गोलियां चलाने” का आदेश दे रही थीं। प्रथम आलोचक जैसे मीडिया ने इसे लाइव दिखाया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 तक 1400 से ज्यादा लोग मारे गए थे। कोर्ट ने इसे “सिस्टेमैटिक हिंसा” करार दिया। हसीना ने 2024 के शुरू में जनवरी चुनाव में विपक्ष को कुचल दिया। अवामी लीग की सरकार ने विपक्षी दलों को दबाया, जिससे छात्र सड़कों पर उतर आए। जुलाई में शुरू हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए।

पुलिस ने लाइव गोलियां चलाईं, हजारों गिरफ्तारियां हुईं। हसीना ने इसे “आतंकवाद” बताया, लेकिन कोर्ट ने पाया कि वे ही “मास्टरमाइंड” थीं। फैसले में कहा गया कि जनवरी 2024 के बाद हसीना तानाशाह बनने की राह पर थीं। उन्होंने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को भी आरोपी बनाया। अल-मामून ने कोर्ट में हसीना के खिलाफ गवाही दी, जिससे ट्रायल तेज हुआ। उन पर आरोप लगा- हत्याएं, जबरन गायब करना, यातनाएं। कोर्ट ने इन्हें साबित पाया। हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने चेतावनी दी कि अगर अवामी लीग से बैन न हटाया तो फरवरी चुनाव में हिंसा हो सकती है। लेकिन पीड़ित परिवारों ने कोर्ट के बाहर नारे लगाए: “फांसी दो, न्याय दो!” मीर मुग्धो के भाई ने कहा, “लोगों ने अगस्त 2024 में ही फैसला सुना दिया था।”












