
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत आशिका जैन (आई.ए.एस.) डिप्टी कमिश्नर होशियारपुर, सिविल सर्जन होशियारपुर डॉ. मनदीप कमल और डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. स्वाति शीमार के निर्देशानुसार जिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र होशियारपुर द्वारा जेम्स कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल, होशियारपुर में प्रिंसिपल संगीता निस्तांद्रा और डॉ. जसलीन कौर (मेडिकल अधिकारी इंचार्ज) की अगुवाई में नशाखोरी के दुष्प्रभाव, कारण और इसके इलाज संबंधी जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया।

इस अवसर पर प्रिंसिपल ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया और युवाओं को नशे जैसी बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है। इस मौके पर जिला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र होशियारपुर की मेडिकल अधिकारी डॉ. जसलीन कौर विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
डॉ. जसलीन कौर ने नशे (Substance Abuse) के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हमें युवाओं में मेहनत के प्रति उत्साह बढ़ाना चाहिए और उन्हें नशे के खिलाफ जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आज से ही हम जागरूक हो जाएं, तभी हम अपने पंजाब को फिर से रंगला पंजाब बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा “टेली-मानस” ऐप और हेल्पलाइन नंबर 14416 और 1800-89-14416 जारी किए गए हैं।
इसके अलावा जिला हेल्पलाइन नंबर 85580-01882 (कार्यदिवस सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक) पर भी संपर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर काउंसलर संदीप कुमारी ने नशाखोरी के दुष्प्रभाव और कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा जिला होशियारपुर में 2 नशा मुक्ति केंद्र सिविल अस्पताल होशियारपुर और सिविल अस्पताल दसूहा में चलाए जा रहे हैं, जहां मरीजों का 15-21 दिन का डिटॉक्सिफिकेशन किया जाता है।
इसके बाद मरीजों को जिला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र, मोहल्ला फतेहगढ़, होशियारपुर में 90 दिनों के लिए रखा जाता है, जहां उनकी व्यक्तिगत, समूह और पारिवारिक काउंसलिंग के साथ-साथ व्यावसायिक कौशल (Vocational Skill Development) का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
जिले में 16 ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक भी विभिन्न स्तरों (जिला, उपमंडल, सीएचसी) पर चल रहे हैं, जहां मरीज और उसके परिवार की सहमति से ऑनलाइन आधारित उपचार शुरू किया जाता है, जो एक वर्ष में पूरा होता है। इस उपचार से ओवरडोज से मृत्यु नहीं होती और एचसीवी, पीलिया, एचआईवी/एड्स जैसी बीमारियों से बचाव होता है।
इस अवसर पर “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत प्रशांत आदिया ने विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पंजाब सरकार के “पिंडों के पहरेदार” कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियानों के बारे में भी बताया। साथ ही विद्यार्थियों को नशा मुक्त रहने की शपथ दिलाई गई।
उन्होंने कहा कि हमें स्वयं जागरूक होना होगा, तभी हम नशे से ग्रसित लोगों की मदद कर सकते हैं। यदि यह संदेश हर घर और गली तक पहुंचाया जाए, तो नशे के शिकार लोगों को उपचार के दायरे में लाया जा सकता है और पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाया जा सकता है। इस अवसर पर राजिंदर शर्मा, हरमिंदर सिंह, मीनू सैनी आदि भी उपस्थित थे।











