
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वह शहर के माडल टाउन इलाके की है और इस तस्वीर में दिख रही इमारत एकदम निगम कमिशनर हाउस के साथ सटी हुई है और इसे रिहायशी नक्शे के तौर पर पास करवाकर कमर्शियल रुप देकर बनाते हुए इतने ऊपर तक खड़ा कर दिया गया है। एक नेता के

मीडिया में इमारत के चर्चाओं में आने के बाद आनन फानन में निगम अधिकारियों ने इसका काम रुकवा दिया। पता चला है कि इस इमारत को बनवाने के पीछे भी एक विधायक साहिब का खासा हाथ है, अन्यथा इमारत के मालिक की क्या मजाल थी कि वह निगम कमिशनर हाउस के साथ नियमों के विपरीत इमारत का निर्माण कर जाता। आपको तो पता ही है कि कट्टर ईमानदार सरकार के अधिकतर कट्टर ईमानदार नेताओं की फितरत कैसी है तथा वह किस प्रकार से दवाब के तहत अधिकारियों से जायज-नाजायज काम करवाकर अपने चहेतों को खुश करने में लगे हुए हैं।
जानकारी अनुसार कुछ समय पहले जब इस जगह पर बनी पुरानी इमारत को ढाया जा रहा था तो लग रहा था कि मालिक द्वारा शायद यहां पर रिहायश को पुनः बनाया जा रहा है, लेकिन देखते ही देखते मालिक द्वारा रिहायशी नक्शे पर निगम कमिशनर की आंखों में धूल झोंकते हुए इसे कमर्शियल रुप देकर यहां तक खड़ा कर दिया गया, इसका पता इसलिए भी नहीं चला, क्योंकि मालिक द्वारा बड़े ही शातिराना तरीके से इसे आगे से पल्लियां लगाकर ढका गया था। ताकि पता न चले कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है।
पता चला है कि एक नेता जी ने इस मार्ग को कमर्शियल करवाने के लिए काफी जद्दोजहर की थी तथा कर भी रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द इसका नोटीफिकेशन हो जाए और उनकी खुद की प्रापर्टी का रेट बढ़ जाए या उनकी प्रापर्टी भी कमर्शियल हो जाए। इसके विपरीत उक्त इमारत की बात करें तो इस बात के जानकार एक विधायक जी द्वारा इसे इतना बड़ा बनवा दिया गया और इमारत शाखा के कर्मचारी आंखों पर पट्टी बांधे शहर में नियमों के विपरीत बन रही इमारतों पर चाबुक चलाते रहे। अब यह पता चला है कि मीडिया में आने के बाद निगम कमिशनर द्वारा इस बात का कड़ा संज्ञान लिया गया तथा उनके द्वारा काम बंद करवा दिया गया है।
यह भी पता चला है कि उक्त इमारत को सील करने की कार्यवाही को अमल में लाने की कवायद भी शुरु कर दी गई है, जिसमें शायद जनगणना व हड़ताल के चलते अमली जामा पहनाने में देरी हो रही है। अब सवाल यह है कि जब यह मार्ग कमर्शियल नहीं हुआ तो विधायक जी को दवाब डालते हुए बनवाने की इतनी जल्दी क्या थी तथा अगर पहले से उक्त मार्ग पर कुछेक लोगों ने कमर्शियल इमारतें बना ली थीं तो उन पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई, क्या एक चोरी करे तो क्या दूसरे को चोरी करने का अधिकार दिया जा सकता है? अब देखना यह होगा कि इस मामले में निगम द्वारा और कितनी सख्त कार्यवाही की जाती है।












