
हिमाचल प्रदेश (द स्टैलर न्यूज़)। ननखड़ी तहसील के लोगों का 12 साल का इंतजार बेकार हो गया है। 12.50 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए ननखड़ी डिग्री कॉलेज के बहुमंजिला भवन पर ताला लटकने की नौबत आ गई। प्रदेश सरकार ने 75 से कम छात्रों वाले कॉलेजों को बंद करने की अधिसूचना जारी की है, जिसकी चपेट में यह नवनिर्मित कॉलेज भी आ गया है। सरकार के इस फैसले से इलाके की 18 पंचायतों के विद्यार्थियों, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के भविष्य पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। वर्ष 2014 में ननखड़ी क्षेत्र के छात्रों को इस कॉलेज की सौगात मिली थी। तब से लेकर आज तक विद्यार्थी एक पुराने स्कूल भवन में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर थे। लोगों को उम्मीद थी कि नया भवन बनने से पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा। भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन इसी बीच सरकार ने नए दाखिलों पर रोक लगा दी। कॉलेज में अभी केवल 42 छात्र पढ़ रहे हैं और प्रथम वर्ष के दाखिले होने बाकी थे।

कॉलेज बंद होने के बाद अब इन छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए भारी संघर्ष करना पड़ेगा। सबसे दूर खमाड़ी गांव से रामपुर कॉलेज की दूरी करीब 100 किलोमीटर है। पहाड़ी रास्तों का लंबा सफर, महंगा किराया और हॉस्टल का खर्च उठाना गरीब परिवारों के लिए असंभव है। ग्रामीणों को डर है कि इसके चलते कई छात्रों को 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ सकती है। लोगों का कहना है कि दुर्गम क्षेत्र होने के कारण छात्रों की संख्या कम होना स्वाभाविक है, लेकिन इस आधार पर संस्थान को बंद कर देना जनता के साथ अन्याय है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व भाजपा प्रत्याशी कौल सिंह नेगी ने सरकार के इस कदम को छात्र विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि ननखड़ी 15 से अधिक पंचायतों का केंद्र है। छात्रों की कम संख्या का हवाला देकर कॉलेज बंद करना गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इस फैसले को तुरंत वापस ले। उधर, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।











