
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रजनीश शर्मा। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रतिभाशाली विद्यार्थी को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। जब विद्यालय का नेतृत्व दूरदर्शी सोच, प्रभावी मार्गदर्शन और विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ कार्य करता है, तब आर्थिक अभाव भी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं पाता। इसका उत्कृष्ट उदाहरण राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय टौणी देवी में देखने को मिला है, जहाँ प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा के नेतृत्व, सतत प्रयासों एवं सुव्यवस्थित कार्ययोजना के परिणामस्वरूप पिछले तीन वर्षों में विद्यालय के 68 मेधावी विद्यार्थियों को SBI आशा छात्रवृत्ति के अंतर्गत कुल ₹9,35,000 की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। यह छात्रवृत्ति केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए सहायता राशि नहीं है, बल्कि उन विद्यार्थियों की प्रतिभा का सम्मान भी है, जिन्होंने अपनी-अपनी कक्षाओं में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करते हुए श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया। इस सम्मान ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयाँ दी हैं तथा विद्यालय में स्वस्थ शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता की संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ किया है। प्रधानाचार्य ने विद्यालय में छात्रवृत्ति योजनाओं को मिशन मोड में लागू करने की पहल की। विद्यार्थियों और अभिभावकों को योजनाओं की जानकारी देना, पात्र विद्यार्थियों की समय रहते पहचान करना, आवश्यक दस्तावेज़ों की तैयारी सुनिश्चित करना, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को त्रुटिरहित ढंग से पूरा करवाना तथा प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक योजना का लाभ पहुँचाना-इन सभी कार्यों के लिए विद्यालय स्तर पर सुनियोजित व्यवस्था विकसित की गई।

नियमित करियर काउंसलिंग, शैक्षणिक मार्गदर्शन और निरंतर प्रेरणा के कारण विद्यार्थियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित हुई। विद्यालय की उपलब्धियाँ निरंतर बढ़ती रहीं। शैक्षणिक सत्र 2023–24 में 17 विद्यार्थियों को ₹10,000 प्रति विद्यार्थी की दर से कुल ₹1,70,000 की छात्रवृत्ति प्राप्त हुई। इसके बाद 2024–25 में यह संख्या बढ़कर 33 विद्यार्थियों तक पहुँच गई, जिन्हें ₹15,000 प्रति विद्यार्थी के अनुसार कुल ₹4,95,000 की छात्रवृत्ति मिली। वहीं 2025–26 में भी 18 विद्यार्थियों ने अंतिम सूची में जगह बना ली है जिन्हें ₹15,000 की दर कुल ₹2,70,000 की छात्रवृत्ति मिलेगी इस प्रकार मात्र तीन वर्षों में विद्यालय के 68 विद्यार्थियों को ₹9,35,000 की छात्रवृत्ति प्राप्त हुई, जो सरकारी विद्यालयों के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। प्रधानाचार्य का मानना है कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक भी है। जब किसी विद्यार्थी की मेहनत को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलता है, तो वह स्वयं और अधिक बेहतर करने के लिए प्रेरित होता है तथा अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनता है। यही कारण है कि विद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी क्षमता के अनुरूप उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जाता है। इस अभियान को सफल बनाने में विद्यालय के श्री कृष्ण चंद सहित समस्त शिक्षकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यार्थियों को आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेज़ सत्यापन तथा समयबद्ध कार्यवाही में निरंतर सहयोग प्रदान किया गया।
अभिभावकों ने भी विद्यालय प्रशासन के इन प्रयासों की सराहना करते हुए इसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक पहल बताया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ केवल छात्रवृत्ति प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि विद्यालय में उत्कृष्टता, समान अवसर, जवाबदेही और उपलब्धि-आधारित शैक्षणिक संस्कृति को मजबूत करती हैं। इससे सरकारी विद्यालयों के प्रति समाज का विश्वास बढ़ता है और यह संदेश जाता है कि गुणवत्तापूर्ण नेतृत्व, समर्पित शिक्षक और प्रेरित विद्यार्थी मिलकर किसी भी विद्यालय को उत्कृष्टता के नए आयाम तक पहुँचा सकते हैं। टौणी देवी विद्यालय ने यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो, कार्ययोजना प्रभावी हो और प्रत्येक विद्यार्थी तक समान अवसर पहुँचाने का संकल्प हो, तो सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित छात्रवृत्तियों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह उपलब्धि केवल ₹9.35 लाख की छात्रवृत्ति प्राप्त करने की कहानी नहीं, बल्कि प्रतिभा को पहचानने, उसे अवसर देने और उत्कृष्टता को सम्मानित करने की एक प्रेरक शैक्षणिक यात्रा है, जो निस्संदेह अन्य विद्यालयों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।












