
दातारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। कांग्रेस नेता सुमित डडवाल तथा अन्य हल्दी घाटी की माटी से भरा हुआ कलश लाए। उन्होंने यह पावन एवं पूजनीय कलश इंका के वरिष्ठ नेता सन्नी राजपूत तथा साथियों को भेंट किया। सन्नी राजपूत ने इस पावन कलश को नमन करते हुए हल्दी घाटी के गौरवशाली इतिहास के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि वीरों की धरती हल्दीघाटी राजस्थान के राजसमंद और उदयपुर जिलों के बीच अरावली पहाड़ियों में स्थित एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थान है, जो 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच हुए प्रसिद्ध हल्दीघाटी के युद्ध के लिए सबसे खास माना जाता है।

हल्दीघाटी की मुख्य विशेषताएँ बताते हुए सन्नी राजपूत ने बताया कि इस घाटी की मिट्टी का रंग हल्दी जैसा पीला है, जिसके कारण इस जगह का नाम ‘हल्दीघाटी’ पड़ा। उन्होंने कहा कि यहाँ महाराणा प्रताप ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। उनकी सेना का नेतृत्व हकीम खान सूरी ने किया था।
सन्नी राजपूत ने कहा कि यह वही स्थान है जहाँ महाराणा प्रताप के वफादार घोड़े चेतक ने अपने स्वामी की जान बचाते हुए प्राण त्याग दिए थे और उसकी याद में चेतक समाधि बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद जिस स्थान पर भारी खून-खराबा हुआ था, उसे रक्त तलाई कहा जाता है। यहीं पर झाला मानसिंह की छतरी भी स्थित है।
महाराणा प्रताप संग्रहालय की स्मृतियों से जुडा़ हुआ एक आधुनिक म्यूजियम है जहाँ उस काल के शस्त्र, पगड़ी और मेवाड़ के इतिहास से जुड़ी चीजें प्रदर्शित हैं। और हल्दीघाटी क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और चैत्र मास में खिलने वाले विशेष गुलाबों तथा उससे बनने वाले प्राकृतिक शरबत व इत्र के लिए भी प्रसिद्ध है।
इस अवसर पर संदीप मन्हास, विकास मनकोटिया, एडवोकेट भूपेन्द्र सिंह घुम्मण, ठाकुर विजय सिंह,राय सिंह राजू, अश्वनी,साहिल अमनदीप सिंह तथा अन्य उपस्थित थे।












