
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। सामाजिक व प्राकृतिक वातावरण प्रेमी पी.के. राणा उर्फ ठाकुर वीर प्रताप राणा ने पंजाब में लगातार गिरते भूमिगत जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र एवं पंजाब सरकार से भूजल संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी नीति बनाने की मांग की है। पी.के. राणा ने कहा कि पंजाब का भूमिगत जल आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। कोका-कोला जैसी पेय पदार्थ कंपनियों, अन्य उद्योगों, डेटा सेंटरों और कृषि क्षेत्र द्वारा भूजल के अत्यधिक दोहन पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। विशेष रूप से गहरे भूजल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, उद्योगों और डेटा सेंटरों में भूजल की जगह उपचारित एवं पुनर्चक्रित पानी का उपयोग बढ़ाया जाए तथा बड़े जल उपभोक्ताओं के पानी के उपयोग की नियमित निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। पी.के. राणा ने पंजाब की कृषि के लिए नहरी पानी के अधिकतम उपयोग की मांग करते हुए कहा कि सरकार नहरों की सफाई, मरम्मत और विस्तार पर ध्यान दे तथा किसानों को कम पानी वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के लिए प्रोत्साहित करे।
उन्होंने कहा कि भूजल संरक्षण की जिम्मेदारी केवल किसानों की नहीं है। सरकार, उद्योगों, डेटा सेंटरों और सभी बड़े जल उपभोक्ताओं को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। साथ ही वर्षा जल संचयन, तालाबों के संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से भूजल पुनर्भरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में पानी के संकट को केवल वर्तमान जरूरतों के आधार पर नहीं देखा जा सकता। आज भूजल का जितना अधिक दोहन होगा, आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का संकट उतना ही गंभीर होगा। इसलिए विकास की ऐसी नीति जरूरी है जिसमें उद्योग, कृषि और आधुनिक तकनीकी क्षेत्र पानी के सीमित संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करें और जल संरक्षण को विकास का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।
पी.के. राणा ने यह भी मांग की कि पंजाब में प्रत्येक बड़े जल उपभोक्ता के लिए पानी के उपयोग और संरक्षण की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। भूजल निकालने के साथ-साथ जल पुनर्भरण की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को गांव-गांव वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज की योजनाएं लागू कराकर जनभागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि पंजाब के जल संसाधनों को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित किया जा सके। पी.के. राणा ने केंद्र एवं पंजाब सरकार से अपील की कि पंजाब के गिरते भूजल स्तर को देखते हुए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, नहरी पानी का उपयोग बढ़ाया जाए और गहरे भूजल के अनियंत्रित दोहन पर प्रभावी रोक लगाई जाए।












