
मुंबई (द स्टैलर न्यूज़)। संतोष दावखर की फिल्म ‘गोंधल’ 13 नवंबर, 2026 को सात भाषाओं- हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और अंग्रेज़ी में दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है। यह एक ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि पहली बार किसी मराठी फिल्म को वैश्विक स्तर पर सात भाषाओं में दोबारा रिलीज़ किया जा रहा है। फिल्म भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और अफ्रीका सहित कई क्षेत्रों में रिलीज़ होगी।

99वें अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि संतोष दावखर की फिल्म ‘गोंधल’ का ग्लोबल ट्रेलर रिलीज़ हो गया है। ट्रेलर इस गहन मनोवैज्ञानिक थ्रिलर की एक प्रभावशाली झलक पेश करता है। शानदार दृश्य, सांस्कृतिक परिवेश और रहस्य की परतों में बुनी कहानी फिल्म की उस बेचैन कर देने वाली दुनिया की ओर संकेत करती है, जिसने इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘गोंधल’ सुमन और आनंद राव नामक नवविवाहित जोड़े की कहानी है, जिनकी ज़िंदगी तब एक परेशान कर देने वाला मोड़ ले लेती है, जब इच्छाएँ, कर्तव्य और आस्था आपस में टकराने लगते हैं। एक दुल्हन की चाहत, पति की ज़िम्मेदारियाँ और रहस्यमयी घटनाओं की एक श्रृंखला धीरे-धीरे इस जोड़े को अनिश्चितताओं के ऐसे जाल में उलझा देती है, जहाँ दिखाई देने वाली हर चीज़ सच नहीं होती, जबकि सच्चाई अपनी जगह कायम रहती है। ट्रेलर अपने रहस्यमय दृश्यों और ऐसे रिश्ते की झलकियों के ज़रिए उत्सुकता बढ़ाता है, जो निजी इच्छाओं और गहरे दायित्वों के बीच फंसा हुआ है। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरणा लेते हुए संतोष दावखर क्षेत्रीय प्रामाणिकता और मनोवैज्ञानिक तनाव का अनूठा मेल प्रस्तुत करते हैं। यह कहानी दर्शकों के मन में सतह के नीचे छिपे सच को लेकर कई सवाल छोड़ जाती है।
फिल्म के बारे में बात करते हुए, लेखक-निर्देशक संतोष दावखर कहते हैं, “भारतीय सिनेमा को लेकर वैश्विक धारणाएँ अक्सर गरीबी और जातिगत संघर्षों की कहानियों से बनती हैं। ये महत्वपूर्ण वास्तविकताएँ हैं, लेकिन भारत की पूरी अभिव्यक्ति नहीं हैं। ‘गोंधल’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही संस्कृति, लोगों और परंपराओं का संगम है। दुनिया को इस परंपरा से परिचित कराना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। अकादमी पुरस्कारों जैसे वैश्विक मंच फिल्मकारों को अपनी जड़ों की सांस्कृतिक पहचान और विशिष्टता को भारत तक सीमित न रखते हुए, दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाने में मदद करते हैं। इससे दुनिया भारत को उसके वास्तविक स्वरूप में अनुभव कर सकती है। मैंने इस फिल्म को इसलिए निर्मित किया, ताकि ऐसी ही एक सशक्त परंपरा को सांस्कृतिक प्रामाणिकता और सार्वभौमिक सिनेमाई भाषा के माध्यम से वैश्विक पर्दे तक पहुँचाया जा सके।” ऑस्कर की दिशा में आगे बढ़ते हुए, ‘गोंधल’ 99वें अकादमी पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है। फिल्म पर कई अन्य श्रेणियों में भी विचार किया जा रहा है, जो अंतर्राष्ट्रीय पहचान की दिशा में इसके सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
संतोष दावखर ने 56वें अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सिल्वर पीकॉक पुरस्कार जीता था। महोत्सव की जूरी ने फिल्म को ‘वास्तविक दुनिया में स्थापित शेक्सपियरियन गाथा’ बताया था। इशिता देशमुख, किशोर कदम, योगेश सोहनी और निशाद भोईर अभिनीत ‘गोंधल’ को संतोष दावखर ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी दावखर फिल्म्स की सह-संस्थापक दीक्षा दावखर के साथ मिलकर निर्मित किया है। कंपनी क्षेत्रीय कहानियों को मंच देने और सिनेमैटोग्राफी, ध्वनि, संगीत तथा अभिनय में उच्चस्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अमलेंदु चौधरी ने की है। फिल्म की शुरुआत 25 मिनट के एक ही निरंतर शॉट से होती है। 99वें अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद, फिल्म का ट्रेलर दर्शकों को इसकी प्रभावशाली दृश्यात्मक दुनिया, मनोवैज्ञानिक रहस्य और सांस्कृतिक जटिलताओं की पहली झलक पेश करता है।












