
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। होशियारपुर में जिन कारणों के चलते डायरिया जैसी महामारी फैली और इसमें किसकी लापरवाही रही इसकी जांच नगर निगम कमिशनर करेंगे और अगर कमिशनर की जांच में कोई कमी रही तो इसकी ज्यूडीशियल जांच करवाने की मांग की जाएगी, ताकि उन आत्माओं को शांति प्रदान की जा सके जो डायरिया का शिकार हुई हैं। उक्त जानकारी जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रधान एवं पार्षद ब्रह्मशंकर जिम्पा ने आज यहां जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने बताया कि कमिशनर द्वारा जांच किए जाने का फैसला नगर निगम हाउस की बैठक में लिया गया, जब मेयर शिव सूद से इस संबंधी सवाल किया गया कि इसका जिम्मेदार कौन है? इस पर मेयर ने कहा कि इसकी जांच कमिशनर नगर निगम करेंगे। जिम्पा ने कहा कि बैठक में उन्होंने मुद्दा उठाया कि 10-4-2015 में क्लोरीन का 20 लाख 43 हजार रुपये का टैंडर हुआ था तथा बड़े दुख की बात है कि निगम ने क्लोरीन ट्यूबवैलों में डाली ही नहीं, जिसके चलते लोग गंदा पानी पीने को विवश हो रहे हैं और डायरिया जैसी भयंकर बीमारी फैली।

उन्होंने सवाल किया कि शहर में ट्यूबवैलों की संख्या 66 से बढक़र 87 हो गई, मगर अभी तक ट्यूबवैलों पर डोजर ही नहीं लगे ताकि उनमें क्लोरीन मिक्स करके साफ पानी जनता को मुहैया करवाया जा सकता। इसलिए इसकी ज्यूूडीशियल इंक्वायरी की जानी बेहद जरुरी है, परन्तु उन्हें कमिशनर पर भी पूरा भरोसा है कि वे आरोपियों को बचाने का प्रयास नहीं करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि नगर परिषद से नगर निगम बने हुए होशियारपुर को काफी साल हो गए, मगर आज तक आप्रेटिंग एवं मेनटिनैंस सैल का गठन क्यों नहीं किया गया, जबकि नगर निगम एवं प्रदेश में अकाली-भाजपा गठबंधन काबिज रहा। जिसके चलते भी जनता कई सुविधाओं से वंचित रह रही है। जब ट्यूबवैलों पर आप्रेटर पूरे नहीं, क्लोरीन डालने वाला कोई नहीं तो ऐसे में जनता को साफ पानी कैसे दिया जा सकता है, सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था। उन्होंने कहा कि नगर निगम में बहुत सारी कमियां हैं जिन्हें दूर करने के लिए व्यापक तौर से योजना बनाकर कार्य करने की जरुरत है और जिसकी भी लापरवाही सामने आती है उसके खिलाफ कार्रवाई को सुनिश्चित किया जाना भी हम सभी की ड्यूटी है, क्योंकि हाउस से ऊपर कोई नहीं है।












