Saturday, October 17, 2026
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मुख्यमंत्री ने किसानों को सीधी अदायगी का किया विरोध

चंडीगढ़(द स्टैलर न्यूज़)। किसानें के लिए बैंक खातों में सीधी अदायगी (डी.बी.टी.) स्कीम का सख़्त विरोध करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बुधवार को कहा कि आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मसले का जल्द हल करने की माँग की है।

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मुख्यमंत्री जिन्होंने इस मुद्दे सम्बन्धी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मीटिंग के लिए समय माँगा है, ने प्रधानमंत्री को इस मामले में अपना निजी दख़ल देने की माँग करते हुए इस संबंधी भारत सरकार के खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को ज़रुरी दिशा-निर्देश जारी करके इस स्कीम को कम-से-कम एक साल के लिए स्थगित करने की अपील की।आढ़तियों और किसानों के बीच दीर्घकालिक संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने इस बात पर सवाल किया कि जब यह व्यवस्था बहुत बढ़िया चल रही है तो इसे क्यों बदला जा रहा है। एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 50 प्रतिशत किसान अपनी ज़मीन ठेके पर देते हैं तो इस तरह ठेके पर ज़मीन जोतने वालों को डी.बी.टी. के द्वारा पैसा कैसे मिलेगा।अपने पत्र में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधानमंत्री का ध्यान मंत्रालय के दिशा-निर्देशों की तरफ खींचा जिसमें पंजाब सरकार को किसानों को सीधी अदायगी और ज़मीन के मालिकों और जोतने वालों के विवरण ऑनलाइन जमा करवाना है, यकीनी बनाने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों और कमीशन एजेंटों (आढ़तियों) जोकि कृषि उपज मंडीकरण समिति (ए.पी.एम.सी.) एक्ट 1961 अधीन लाइसेंस धारक हैं, बीच बहुत पुराने सम्बन्ध हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से राज्य की खरीद एजेंसियाँ और एफ.सी.आई. केंद्रीय पूल के लिए अनाज की खरीद कर रही हैं।उन्होंने कहा कि किसानों ने कभी भी एम.एस.पी. की अदायगी न होने की शिकायत नहीं की और राज्य सरकार इन आढ़तियों के द्वारा ही किसानों को ऑनलाइन अदायगी यकीनी बना रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ज़मीन के मालिकों और काश्तकारों ( ठेके पर ज़मीन लेने वाले) के मामले में अनावश्यक कानूनी पेचीदगियां पैदा हो सकतीं हैं, ख़ासकर किसानी आंदोलन के दौरान। उन्होंने कहा, ’’यह किसानों के दरमियान अनावश्यक बेचैनी और गुस्से का कारण बन सकती है।’’ उन्होंने आगे कहा कि इस दिशा में प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के अंतर्गत सॉफ्टवेयर को लाने में काफ़ी समय लगेगा।

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