
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्रीमती सरस्वती देवी मैमोरियल एजुकेशनल एंड वैल्फेयर सोसायटी की तरफ से गांव तनुली जिला होशियारपुर पंजाब में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। भारत सरकार की स्कीम नई-रौशनी (अल्पसंख्यक महिलायों में नेतृत्व विकास प्रशिक्षण) अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालयों के तहत हैंडहोल्डिंग की मीटिंग की गई। जिसमें निपुण शर्मा ने बताया कि भारत की आधी आबादी महिलाओं की है और विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर महिला श्रम में योगदान दे तो भारत की विकास दर दहाई की संख्या में होगी। फिर भी यह दुर्भाग्य की बात है कि सिर्फ कुछ लोग महिला रोजगार के बारे में बात करते हैं जबकि अधिकतर लोगों को युवाओं के बेरोजगार होने की ज्यादा चिंता है। संत कबीर दास जी ने कहा है गये रोये हंसि खेलि के, हरत सबौं के प्रान कहै कबीर या घात को, समझै संत सुजान। इसका अर्थ यह है कि गाकर, रोकर, हंसकर या खेल कर नारी सब का प्राण हर लेती है। कबीर कहते है कि इसका आघात या चोट केवल संत और ज्ञानी ही समझते है। संस्था की मुख्य प्रबंधक पूजा शर्मा ने बताया कि आज महिलाएं घर और दफ्तर दोनों को अच्छे और संतुलित तरीके से चला रही है।

पहले की तुलना में आज हर लडक़ी देश में शिक्षित हो रही है और हर क्षेत्र में किसी न किसी पद पर कार्य कर रही है। पुरुषो के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही है। कहीं न कहीं आज नारी की सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न लग रहे है। इसका कारण है, नारियों पर आये दिन बढ़ते हुए अत्याचार और बलात्कार इत्यादि जैसे निंदनीय अपराध है। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार और कानून ने कई सख्त नियम बनाये है। फिर भी देश के कई स्थानों में महिलाओं का अपहरण और हत्या जैसे संगीन जुर्म के बारे में सुनने को मिल रहे है। अब समय आ गया है कि सरकार और समाज एकत्रित होकर हल निकाले ताकि महिलाएं महफूज़ रहे। आज भी कुछ जगहों में नारियों को दहेज़ प्रथा जैसी कुप्रथाओ के कारण अपने ससुराल के अत्याचार सहन करने पड़ते है। दहेज़ पाने के लिए कुछ लोग इतने हिंसक बन जाते है कि लड़कियों को जिन्दा जला देते है।
सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाये है और दोषियों को सजा मिल रही है। मगर ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाना अनिवार्य हो गया है। विदेशी संस्कृति का प्रचलन देश में काफी बढ़ गया है। लड़कियां अगर मॉडर्न और छोटे कपड़े पहनती है , तो बुरी मानसिकता वाले लोग उसे गलत नजऱ से देखते है। किसी के बारे में सोच उसके कपड़ो से नहीं बनानी चाहिए। कुछ मनचले लोग अपनी घिनौने मानसिकता की वजह से ऐसा करते है। इस मोके पर बलविंदर कौर, संतोष रानी, जोगिन्दर कौर, हरजीत कौर, राजविन्दर, गुरप्रीत आदि उपस्थित थे।












