
अमृतसर(द स्टैलर न्यूज़)। पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत चावला ने कहा कि खालिस्तानी समर्थक व अलगाववादी अमृतपाल आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। शाबाश पंजाब पुलिस । अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद यह पता लगाना भी जरूरी है कि उसे आर्थिक सहायता कौन कर रहा था। इसके अलावा देश व विदेश में उसके कितने समर्थक उसे गुप्त रूप से सहायता पहुंचा रहे थे। सिर्फ आठ महीने पहले वह भारत में आया।

क्या यह किसी को दिखाई नहीं दिया कि उसके भारत पहुंचने से पहले ही उसकी दस्तारबंदी के लिए रोडे गांव क्यों तय किया गया? उसे इतनी गाड़ियां, हथियार, पैसा और पीछे चलने वाली भीड़ किसकी योजना से तैयार हुई? सच तो यह है कि उसे भारत भेजने से पहले ही किसी देश की दुश्मन एजेंसी ने उसके लिए अपने देश में जमीन तैयार की, जिसे अपने देश की गुप्तचर एजेंसियों को शायद पता ही नहीं लगा। यह बहुत अफसोस की बात हैं। और देश के लिए खतरा भी है।
वैसे तो पुलिस के हाथों उसका फरार हो जाना भी पुलिस की शान पर धब्बा है और छत्तीस दिनों तक वह चकमा देता रहा, यह भी चिंता का विषय है। इस सबका एक लाभ जरूर हो गया उसके शरणदाता, उसको धन देने वाले, गाड़िया देने वाले और उसे छुपाकर रखने वाले लोगों को सरकार को पता लग गया । अब सबके साथ कानून के अनुसार वही व्यवहार किया जाए जो ऐसे लोगों के साथ होना चाहिए।












