
सीता और गीता, राम और शाम तथा वो सलमान खान के डबल रोल वाली फिल्म तो आपने देखी ही होगी, जिसका एक गीत बहुत फेमस हुआ था, जिसमें लाइन थी, कैसे मैं आऊं लिफ्ट तेरी बंद है… आ जा आ जा राजा… सो एडं सो। तो बात यह है कि कई बार फिल्मों में दिखाई जाने वाली कई कहानियां हकीकत में भी देखने को मिल जाती हैं तथा आपने भी बहुत सारे भाईयों एवं बहनों को हमशक्ल देखा होगा कि पता ही नहीं चलता कि बड़ा कौन और छोटा कौन व क्या नाम किसका है। खैर यह तो रही दुनियादारी की बातें और ये खेल है ऊपर वाले का। लेकिन महशक्ल होने का खेल अगर कोई राजनीतिक पार्टी खेल जाए तो चर्चा तो बनती है। तो हुआ यूं कि जैसा कि आप सभी को पता ही है कि देश में चुनाव का माहौल बन रहा है और लगभग हर राजनीतिक दल जोरशोर के साथ जीत की उम्मीद लिए मैदान में उतरा हुआ है। देश में चुनाव के आखिरी चरण में पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश में मतदान 1 जून 2024 यानि कल सुबह होने जा रहा है। मगर, मतदान से एक दिन पहले भाजपा के एक प्रत्याशी से जुड़ी ऐसी चर्चा से सार्वजनिक होने से राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ जनतक गलियारों में गर्माहट से तापमान और बढ़ गया है।

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जानकारी अनुसार भाजपा द्वारा घोषित एक प्रत्याशी की शक्ल हू-ब-हू अपनी बहन से मिलती है तथा दोनों को एकसाथ खड़ा कर दिया जाए तो कोई पहचान ही सकता कि असली प्रत्याशी कौन है। पार्टी सूत्रों से ही मिली जानकारी अनुसार इसी बात का फायदा उठाते हुए पार्टी नेताओं ने रोड़ शो के दौरान जब असल प्रत्याशी की तबीयत खराब हो गई और रोड़ शो की गरिमा से गदगद हुए पार्टी नेताओं को शो फ्लाप होता नज़र आने लगा तो उन्होंने सीता और गीता फिल्म को याद करते हुए हमशक्ल होने का लाभ लेने में भलाई समझी और जनता को बे…… बनाते हुए उनकी बहन को गाड़ी पर चढ़ा दिया और जनता के समक्ष हाथ जुड़वा दिए। दवा आदि लेने के काफी देर बाद जब असल प्रत्याशी को अच्छा लगने लगा और जब वह नामांकन पत्र भरने के स्थान पर पहुंच गए तो असल को फिर से जनता के समक्ष पेश कर दिया गया और उन्हीं के हाथों से नामांकन पत्र दाखिल करवाया गया। वैसे अगर हमशक्ल से करवा भी देते तो भी शायद किसी को पता नहीं चलता। और तो और रोड शो संबंधी जो वीडियो लाइव की गई थी, उसे अगर ध्यान से देखा जाए तो अंतर साफ पता चल जाता है। मगर, अब आप तो समझते हैं कि इतनी मगजमारी कौन करे।
ये तो भला हो विपक्षी दलों का जिन्होंने कड़ी मेहनत से फोटो और वीडियो को ध्यान से देखा और दोनों में अंतर देखकर पता किया कि असली और नकली में फर्क क्या है। अन्यथा इतना बड़ा सच सबसे छिपा ही रह जाता। अब चर्चा यह है कि राजनीतिक लाभ के लिए जो लोग जनता को इस कद्र मुर्ख बना सकते हैं तो वह आगे क्या करेंगे, इसका सोच कर ही डर लगने लगता है। वैसे भी सभी को पता ही है कि उनके पास अपनी उपलब्धियों से ज्यादा एक बड़े नेता के नाम का ही सहारा है, जिसके सहारे वह जीत के सपने देख रहे हैं और उन्हें यही सपने दिखाकर उनके कुछ करीबियों द्वारा उन्हें खूब मांझा भी लगाया जा रहा है तथा लगाया क्या जा रहा, अब तक तो लग भी गया….। खैर यह तो उनका निजी मामला है, इस पर टिप्पणी न भाई न। वैसे एक बात बताऊं, इस हमाम में सभी नंगे हैं। जिसको मिला उसने भाप नहीं निकाली और जिस नहीं मिला उसने शोर मचाया। अब कईयों को एक रात पहले क्या मिला उनकी भी बोलती बदली-बदली सी लग रही है। आखिर ये माजरा क्या है और क्या राम राम करना पराया माल अपना की कहावत को चरितार्थ करने में तो नहीं लगा हुआ ये टोला। खैर हमें क्या, ये भी उनका निजी मामला होगा।
अब बांटेगा तो वही न जिसके पास होगा। जिसके पास नहीं है उसके पास कौन जाएगा… ये तो दुनिया की रीत है। जिसके पास पैसा वो राजा और जिसके पास नहीं वो …..। समझे लल्लू नाथ ऐसा मुझे कहा गया था, जब मैंने एक नेता से कहा था कि भाई साहब पैसा ही सब कुछ नहीं होता तो उसने कहा कि अब अपना ही हाल देख लो, तुम्हारे पास भी तो पैसे नहीं हैं, आता है कोई पूछने, सब बड़ी बड़ी कंपनियों को माथा टेकते हैं। जब तुम लिखते हो तो बार-बार झांकते हैं…अन्यथा, तुम खुद ही जय राम जी की लिख देते हो। अब मुझे दें इजाजत। क्या, आज इजाजत नहीं देंगे। क्यों? आज तो बताना ही पड़ेगा कि ये प्रत्याशी कौन है और कहां की है। देखो भाई इस उलझन में मुझे मत डाला करो। मैं ठहरा छोटा सा पत्रकार। जो चर्चा सामने आए उसे आपके समक्ष पेश कर देता हूं। न न न न न न न, खेला नहीं होवे, इजाजत तो लेकर रहूंगा। क्योंकि, मुझे पता है आप सभी बहुत समझदार हैं और इशारों को भलीभांति समझ जाते हैं। जय राम जी की।











