
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। आज 4 मार्च की सुबह से एक बार फिर से शहर के फगवाड़ा रोड पर स्थित रेलवे फाटक को तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया है। जिस कारण ट्रैफिक को पुलिस द्वारा डायवर्ट तो किया गया, लेकिन रेलवे की तरफ से लोगों की सुविधा के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। जिस कारण ऐसा प्रतीत हो रहा है कि होशियारपुर का रेलवे स्टेशन पूरी तरह से अनाथ एवं लावारिस हो चुका है। एक समय था जब तत्कालीन सांसद सोम प्रकाश रेलवे स्टेशन की नुहार बदलने के लेकर काफी उत्साहित दिखे थे और वह इसे अपनी बड़ी उपलब्धियों में शामिल करते थे। मगर, उन्होंने भी रेलवे की ढीली कार्यगुजारी एवं जनता को किसी भी काम के लिए पूर्व सूचना देने संबंधी उचित कदम उठाने जरुरी नहीं समझे। वर्तमान में तो वैसे ही हालात उलटे हैं, क्योंकि अब केन्द्र में भाजपा है और यहां आप के सांसद हैं। ऐसे में रेलवे विभाग को किसी की क्या परवाह।

आपको बता दें कि रेलवे द्वारा रेलवे फाटक पर लाइन बदलने एवं रिपेयर का काम करवाया जा रहा है, जिस कारण फाटक तीन दिन यानि कि 4, 5 व 6 मार्च को सायं 8 बजे तक बंद रखा जाएगा। मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने बताया कि 6 मार्च सायं 8 बजे तक फाटक बंद रखा जाएगा, मब रेलवे ने जनता को सूचना हित कोई समाचार दिया या नहीं इस बारे में उन्हें नहीं पता, वह तो अपनी ड्यूटी कर रहे हैं तथा लोगों से अपील है कि फाटक बंद रहने के कारण फगवाड़ा रोड की तरफ जाने वाले लोग या तो सुतेहरी रोड से होकर आएं या जाएं तथा जो लोग फगवाड़ा या लुधियाना जाना चाहते हैं वह बाईपास से होकर जाएं।
भले ही होशियारपुर के रेलवे स्टेशन को करोड़ों रुपये खर्च करके अत्याधुनिक बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक के कारण आम लोगों को रोजाना ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले रेलवे फाटक पर हाथों से लगाने एवं उठाने वाला फाटक था तो रेलगाड़ी के गुजरने या आने के मात्र 5-7 सैकेंड में ही फाटक को उठा दिया जाता था। लेकिन अब नई तकनीक विकसित होने के कारण फाटक बिजली संचालित हो गया है तथा गाड़ी के आने पर जब तक गाड़ी प्लेटफार्म पर नहीं पहुंच जाती तब तक फाटक उठाए जाने संबंधी सिगनल ही नहीं आता तथा गाड़ी जाने पर भी जब तक गाड़ी करीब आधा किलोमीटर आगे तक नहीं चली जाती तब तक फाटक नहीं उठाया जाता। जिस कारण ट्रैफिक जाम के साथ-साथ लोगों का समय और तेल दोनों की बर्बादी होने लगी है। लेकिन इस बारे में किसी को कोई चिंता नहीं। नई तकनीक सहूलत के लिए विकसित की जाती है, मगर रेलवे फाटक पर लगता ही नहीं कि तकनीक विकसित हुई है। हां, इतना जरुर है कि फाटक विद्धुत संचालित होने को ही तकनीक का विकास कहा जा रहा है। इसके अलावा आए दिन इसमें खराबी रहने से भी राहगीरों व आम शहरियों को इसका संताप झेलने को विवश होना पड़ रहा है। पिछले दिन ही अभी रेलवे फाटक में खराबी के कारण लोगों को करीब 3-4 घंटे परेशान होना पड़ा। इतना ही नहीं किसी भी तरह के रिपेयर के काम या लाइनें आदि बदलने संबंधी काम करवाए जाने पर रेलवे की तरफ से आम जनता को पूर्व सूचना दी जानी जरुरी नहीं समझी जाती। जिस कारण परेशानी और बढ़ जाती है।












