
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। अमृतसर प्रशासन और पुलिस की ओर से जब छह जून को सभी व्यापारिक संस्थान बंद रखने का अलिखित आदेश दिया गया, यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं स्थगित की गईं। स्कूल कालेजों की कोई भी गतिविधि छह जून को न रखने का सरकारी आदेश दिया गया। ऐसे में बार बार अमृतसर के प्रशासन, शासन से यह पूछा गया कि व्यापारिक संस्थान बंद करवाने का आदेश किसका है। अमृतसर पुलिस का, प्रशासन का या पंजाब सरकार का गुप्त आदेश है जिसके कारण व्यापारिक संस्थान बंद करवाए गए। वैसे पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से छह जून को व्यापारियों को ही दुकानें बंद करके खुद घरों में बंद रहना पड़ता है।

पंजाब सरकार के सारे दफ्तर खुले हैं और दुकानें बंद। सरकार यह बताए कि फिर सरकारी दफ्तर क्यों खोले गए? यह ठीक है कि जो लोग दूर दूर से बसों में आते हैं उनकी हाजिरी आधी रह गई, पर शहर तो पूरा सुनसान है और व्यापारी खाली बैठा है। अफसोस यह है कि सरकारी तंत्र में यह बताने की हिम्मत ही नहीं है कि बाजार किसके आदेश से क्यों बंद रखने का फरमान जारी हुआ? जब पांच जून के समाचार पत्रों में व्यापारिक संस्थान दुकानें बंद रखने की मोटी मोटी खबरें छपीं तब तो पुलिस ने एक बार भी नहीं कहा कि लोग दुकानें खोले, सरकार सुरक्षा देगी। सच तो यह है कि कोई भी सरकार कभी भी यह सुरक्षा नहीं दे पाई।












