Saturday, October 10, 2026
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रथ यात्रा के उपलक्ष्य मे इस्कओन द्वारा निकाली गई 33वी संध्या फेरी

कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया। 28 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में बुधवार को इस्कान कपूरथला की  ओर से 33वी संध्या फ़ेरी मॉडल टाउन से निकाली  गई. जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। भगवान की रथ यात्रा प्रति शहर के सभी निवासिओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। लोगो ने पुष्प वर्षा के साथ  भगवान का स्वागत किया। ये संध्या हरिनाम फ़ेरी मनोज कुमार के निवास स्थान से शुरू होकर अलका आरोड़ा जी के निवास स्थान पर  जाकर समाप्त हुई। भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) ने कहा कृष्णभावनाअमृत आंदोलन का लक्ष्य है सम्स्त जीवो को उनकी मूल चेतना तक वापिस लाना और सभी जीवो को भोतिक रोग से मुक्त करना। ओर यह बताना की  हम सभी  भगवान कृष्ण के अंशस्वरुप है वो हमारे स्वामी है ओर हम सब उनके दास है। हम भाग्यशाली है की भगवान् ने यह मूल्यवान जीवन हमे  उपहार मे दिया  है। भगवान ने  हमे ये मानव शरीर  इसलिए दिया है ताकि हम उनकी भक्ति ओर सेवा कर सके। लेकिन हम ने यह मानव देह पाकर इसे भक्ति करने की  बजाये भोतिक  संसार मे  लगाकर उसी  से आसक्ति कर ली है। आज हम सांसारिक सुख प्राप्त करने के लिए दिन रात भाग रहे हैं।

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ओर सारा जीवन इसी  मे व्यतीत  कर  देते  है।  भगवान कहते है की यह संसारिक  वस्तुयें सुख  नही बल्कि दुख का  कारण  बनती  है। भगवान कृष्ण  ने कहा  है  की  जो  कुछ भी इस संसार मे  है वो एक  न एक  दिन  विनष्ट हो  जायेगा। यह  मानव  योनि  सबसे उतम  है। क्युकि  मानव  योनि  मे हि  हम  भगवान कृष्ण की प्राप्ति कर  सकते है। इसी  योनि  मे  भगवान की  भक्ति  करके  हम  बैकुंठ के  अधिकारी बन  सकते हैं। “परम विजयते श्रीकृष्ण संकीर्तनम” कलियुग में यह संकीर्तन आंदोलन (भगवान के नाम का जप और कीर्तन) मानवता के लिए परम वरदान है और यह भगवान से सीधे जुड़ने और भगवदप्रेम विकसित करने की सर्वोत्तम विधि है। इसीलिए सदा ही भगवान के नाम का जप करिए और ख़ुश रहिए। आगे बताते हुए प्रभु जी ने कहा की 28 जून को सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। इन हरिनाम संध्या फेरिओं से हम सभी का हृदय शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भगवान् सभी के हृदय में प्रवेश कर सकें।जिसके  लिये  हर दिन संध्या हरिनाम निकाल कर लोगो को  भगवान के  हरिनाम मे  शामिल  होने के लिए  कहा  जाता है  ताकि उनका  मनुष्य  जीवन  व्यथ न हो  जाये।

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