
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। होशियारपुर में बड़े पैमाने पर हो रही अवैध खनन के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को करने के निर्देश जारी किए है। साथ ही पूरे क्षेत्र का विस्तृत ड्रोन सर्वे कराने और गूगल अर्थ, इसरो अथवा किसी अन्य विश्वसनीय स्रोत से त्रिआयामी उपग्रह चित्र हासिल करने को कहा है। अदालत का मानना है कि इन चित्रों की मदद से क्षेत्र में समय-समय पर हुए बदलावों और खनन से हुए नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच और सर्वे के लिए होने वाला पूरा खर्च पंजाब सरकार को वहन करना होगा। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने राहुल मनचंदा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अदालत ने पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, होशियारपुर के सचिव को संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सह प्राधिकरण के सचिव की ओर से 14 सितंबर 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में जिले के कई गांवों में बड़े पैमाने पर खनन किए जाने की पुष्टि की गई। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर खनन की गहराई 20 से 110 फीट तक पाई गई। कुछ स्थानों पर पानी भर जाने और पहुंचने में कठिनाई के कारण गहराई का पता नहीं लगाया जा सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि निरीक्षण दल को वास्तविक स्थलों तक पहुंचने से रोकने या दूसरी ओर ले जाने के प्रयास किए गए। कई स्थानों पर रास्ते बंद मिले, जबकि कुछ जगहों पर रास्तों को तोड़ दिया गया था। निरीक्षण के दौरान कई स्टोन क्रशर इकाइयों पर कर्मचारी नहीं मिले।

हालांकि, वहां ट्रक, टिप्पर और जेसीबी जैसी भारी मशीनें खड़ी थीं। खनन सामग्री के ढेर भी पाए गए। रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि निरीक्षण की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच गई थी, जिसके कारण उस दिन काम बंद रखा गया। अदालत ने इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले संबंधित अधिकारी प्रथम दृष्टया अपने कर्तव्य में विफल रहे हैं। सरकारी अधिकारियों और खनन में शामिल लोगों के बीच मिलीभगत के आरोपों को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया था कि होशियारपुर जिले में स्वीकृत वाणिज्यिक खनन स्थलों, भूमि मालिकों के खनन स्थलों और क्रशर खनन स्थलों में से कोई भी चालू नहीं था। जिले में 31 स्टोन क्रशर पंजीकृत बताए गए, जिनमें 26 चालू थे। हालांकि, उनके लिए कच्चे माल के स्रोत के संबंध में अदालत को संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई थी। अब CBI प्रारंभिक जांच के दौरान जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करेगी। वह जिला प्रशासन, खनन विभाग और विशेषज्ञ संस्थानों की सहायता भी ले सकती है। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर 2026 को होगी। तब तक सीबीआइ को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।












