
कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया। 28 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में वीरवार को इस्कान कपूरथला की ओर से 35वी संध्या फेरी पुराना अस्पताल से निकाली गई. जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। लोगो मे भगवान की रथ यात्रा प्रति उत्साह दिन प्रति दिन बढ़ रहा है। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। लोगो ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। ये संध्या हरिनाम फ़ेरी विशाल अग्रवाल, पलक अग्रवाल के निवास स्थान से शुरू होकर के प्रदीप अग्रवाल और रमन माता के निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुई. भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) ने कहा भगवान के भक्त हमेशा भगवान को आनंदित करने के लिए उत्साहित रहते है। वो हर काम भगवान की प्रसन्ता के लिए करते हैं। वो लोगो मे भक्ति करने के लिये जोश पैदा करते है। प्रन्तु अक्सर देखा जाता है की लोग भगवान को नही अपने आप को आनन्द देना चाहते है। वो भक्ति के नाम पर लोगो को खुश करने मे लगे हुये है। की मैने इसे खुश करना है। भगवान के हरिनाम मे बहुत ताकत है। जो एक बार हरिनाम मे शामिल हो जाता है या हरिनाम का गुणगान कर लेता है उसका यह मानव जीवन सफ़ल हो जाता है। पर आज कल हरिनाम केवल दिखावा रह गया है।

लोगो को हरिनाम की महत्ता के बारे में नही बताया जाता. लोगो को हरिनाम मामूली सी चीज लगती है। परन्तु हम सभी लोगो के घर घर जा कर लोगों को हरिनाम की महिमा के बारे मे बताते हैँ। जिससे लोगो में हरिनाम को लेकर जागरीति उतपन्न हो रही है। हरिनाम ऐसा होना चाहिए जिस जगाह से हरिनाम गुजरे लोग हरिनाम के नाम मे रंग जाये। जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी अट्ल है। मृत्यु को भी जीव नजर अंदाज नही कर सकता। कोई भी जीव जन्म लेता है उसी वक्त उसकी मृत्यु निश्चित हो जाती है। हम भाग्यशाली है की प्रभु ने यह मूल्यवान जीवन उपहार मे हमें दिया है। भगवान ने हमे ये मानव शरीर इसलिए दिया है ताकि हम उनकी भक्ति ओर सेवा कर सके. लेकिन हम ने यह मानव देह पाकर इसे में कभी करने की बजाये भोतिक संसार मे लगाकर उसी से आसक्ति कर ली है। आज हम सांसारिक सुख प्राप्त करने के लिए दिन रात भाग रहे हैं। ओर सारा जीवन इसी मे व्यतीत कर देते है। भगवान कहते है की मेरे लिये यह सब कुछ बेकार है। यह संसारिक वस्तुयें सुख नही बल्कि दुख का कारण बनती है।
भगवान कृष्ण ने कहा है की जो कुछ भी इस संसार मे है वो एक न एक दिन विनष्टहो जायेगा। यह मानव योनि सबसे उतम है। क्युकि मानव योनि मे हि हम भगवान कृष्ण की प्राप्ति कर सकते है। इसी योनि मे भगवान की भक्ति करके हम बैकुंठ के अधिकारी बन सकते हैं। “परम विजयते श्रीकृष्ण संकीर्तनम” कलियुग में यह संकीर्तन आंदोलन (भगवान के नाम का जप और कीर्तन) मानवता के लिए परम वरदान है और यह भगवान से सीधे जुड़ने और भगवदप्रेम विकसित करने की सर्वोत्तम विधि है। इसीलिए सदा ही भगवान के नाम का जप करिए और ख़ुश रहिए. आगे बताते हुये नीरज अग्रवाल (नकुल दास) जी ने कहा की 28 जून को सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। इन हरिनाम संध्या फेरिओं से हम सभी का हृदय शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भगवान् हमारे हृदय में प्रवेश कर सकें। जिसके लिये हर दिन संध्या हरिनाम निकाल कर लोगो को भगवान के हरिनाम मे शामिल होने के लिए कहा जाता है ताकि उनका मनुष्य जीवन व्यर्थ न हो जाये।












