
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्टः रजनीश शर्मा। रक्षाबंधन पर्व इस वर्ष राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी की गाइड्स छात्राओं के लिए यादगार और भावनात्मक क्षण लेकर आया। विद्यालय की गाइड्स ने सरहद पर तैनात वीर जवानों के लिए अपने हाथों से राखियाँ, ग्रीटिंग कार्ड और भावनात्मक संदेश भेजे थे। विशेष बात यह रही कि यह राखियाँ ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीधे लेह और गलवान घाटी तक पहुँचीं, जहाँ जवानों ने इन्हें अपनी कलाई पर बाँधकर बेटियों को स्नेह, आशीर्वाद और धन्यवाद भेजा। प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा के मार्गदर्शन और गाइड कैप्टन कुसुम लता के सहयोग से छात्राओं ने इस पहल को अंजाम दिया। प्रधानाचार्य ने बताया कि “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पूरे देश में सैनिकों के प्रति सम्मान और संवेदना की लहर है। इस वर्ष की राखियाँ सिर्फ रक्षा-सूत्र नहीं, बल्कि देश के रक्षकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक हैं। इन राखियों के साथ भेजे गए संदेशों में बेटियों, बहनों, माताओं और पत्नियों की भावनाएँ झलक रही थीं। किसी ने लिखा कि आप हैं तो हमारी नींद सुरक्षित है तो किसी ने कहा कि हर बहन आपके साथ है, भाई ग्रीटिंग कार्डों पर देशभक्ति की कविताएँ, तिरंगे के चित्र और सैनिकों के साहस को नमन करते शब्द सजे थे।

जब ये राखियाँ गलवान घाटी में तैनात सैनिकों तक पहुँचीं, तो वहाँ का नजारा बेहद भावुक कर देने वाला था। सेना के एक अधिकारी ने फोन और संदेश के माध्यम से विद्यालय तक शुभकामनाएँ पहुँचाईं और बताया कि जवानों ने गर्व और खुशी से इन राखियों को अपनी कलाई पर बाँधा। उन्होंने कहा कि इन राखियों में हमें सिर्फ धागा नहीं, बल्कि अपने देश की बहनों का विश्वास, प्रेम और दुआएँ महसूस हुईं। एक जवान ने भावुक होकर संदेश भेजा कि हम यहाँ ठंडी हवाओं और बर्फीली ऊँचाइयों पर डटे हैं, लेकिन आज यह राखी हमें घर की गर्माहट और बहनों का प्यार दे गई। जवानों ने सभी छात्राओं को आशीर्वाद और धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका यह प्रेम सैनिकों के मनोबल को और ऊँचा करता है। छात्राओं श्रेया, चेतना और प्रियांशु ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनकी राखियाँ सैनिक भाइयों की कलाई पर बंध चुकी हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्यूंकि यह उनके जीवन का सबसे गर्व का पल है।
प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब छात्रों का हृदय देश के लिए धड़कने लगे, तभी सच्चे अर्थों में शिक्षा सार्थक होती है। उन्होंने गाइड्स की इस पहल को पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया और कहा कि आने वाले वर्षों में भी विद्यालय इस परंपरा को जारी रखेगा। टौणी देवी की गाइड्स की यह पहल एक अनूठा संदेश देती है कि चाहे गलवान की ऊँचाइयाँ हों या ऑपरेशन सिंदूर जैसी परिस्थितियाँ, देश की बेटियाँ अपने सैनिक भाइयों को कभी अकेला नहीं छोड़तीं। इस रक्षाबंधन पर सरहद और गाँव के बीच जो भावनाओं की डोर बंधी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।












