Tuesday, November 3, 2026
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योग तन, मन और आत्मा को एकीकृत करने का विज्ञान है: स्वामी विज्ञानानंद

बनगढ़/ऊना (द स्टैलर न्यूज़)।  “दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान” की ओर से अपने स्वास्थ्य जाग्रति कार्यक्रम आरोग्य प्रकल्प के अंतर्गत आज कैदी बंधुओं के सुस्वास्थ्य की मंगल कामना के उद्देश्य से स्थानीय जिला कारागार बनगढ़ ऊना में आज *”विलक्षण योग एवं ध्यान साधना शिविर”* का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान की ओर से “श्री आशुतोष महाराज जी” के शिष्य योगाचार्य स्वामी विज्ञानानन्द जी ने बताया कि बढ़ते हुए शहरीकरण, प्रदूषण, अनियमित आहार विहार और ओद्योगिकीकरण से जहां वृक्ष कटाव से प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति पैदा हुई है वहीँ प्रदूषित वायु में सांस लेना भी दूभर हो चुका है। जिससे हृदय से सम्बंधित रोगों के साथ साथ मधुमेह, टी०बी, कैंसर, डेंगू, चिकनगुनिया व विविध विषम ज्वरों में अभिवृद्धि हो रही है।                               

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स्वामी जी ने बताया की “विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO” के अनुसार विज्ञान का सहारा लेकर आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने जहां चरमोत्कर्ष को प्राप्त किया है वहीँ अभी बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जिनका समाधान आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में तो नहीं परंतु “भारतीय वैदिक योग दर्शन” में है। वस्तुतः योग का आश्रय लेकर *”जीवेम शरदः शतम्”* की अवधारणा के अनुरूप मनुष्य चाहे तो सौ वर्ष तक भी निरोगी जीवन यापन कर सकता है।आवश्यकता है कि योग केवल एक दिन का नहीं, जीवन का अभिन्न हिस्सा बने।क्यों कि स्वास्थ्य का संरक्षण और बीमारियों से सुरक्षा ही योग का उद्देश्य है।

स्वामी जी ने उपस्थित साधकों को ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वीर भद्रासन, करतल ध्वनि योग, नृत्य योग, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, उज्जाई प्राणायाम, स्कन्ध चालन, पाद चालन, सर्वाइकल पेन से संबंधित सूक्ष्म व्यायाम इत्यादि क्रियाओं का विधिवत अभ्यास करवाया और साथ ही इनके दैहिक और वैज्ञानिक लाभों से परिचित भी करवाया।      कार्यक्रम का शुभारंभ *कारगार उप अधीक्षक जगजीत चौधरी व स्वामी जी द्वारा ज्योति प्रज्वलित कर किया गया। र्यक्रम का आरम्भ विधिवत् वेद मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। कैदी बंधुओं ने दैहिक स्वस्थता व आत्मिक शक्ति से ओतप्रोत हो कार्यक्रम का भरपूर लाभ प्राप्त किया।

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