
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने कहा कि भारी बारिश और बाढ़ के कारण जिले में फसलों, मकानों और पशुधन को व्यापक नुकसान हुआ है और ऐसे में योग्य प्रभावितों तक राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा पारदर्शी व समयबद्ध तरीके से पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांवों में मुनादी करवा कर इसका प्रचार करवाएं ताकि कोई भी योग्य व्यक्ति मुआवजे से वंचित न रहे।

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जिले के टांडा उपमंडल में 7 ऐसे गांव है, जहां पर 75 प्रतिशत से ज्यादा किसानों की फसल बाढ़ के कारण खराब हुई है और इन गांवों की गिरदावरी हम एक सप्ताह के भीतर करेंगे, जिस संबंधी पटवारी फील्ड में है। उन्होंने बताया कि यह गांव फत्ता, कुल्ला, सलेमपुर, टाहली, रड़ा, अबदुल्लापुर व मियाणी हैं। उन्होंने बताया कि फसलों के नुकसान की स्थिति में 26 से 75 प्रतिशत तक खराबी पर 10,000 रुपए प्रति एकड़ तथा 76 से 100 प्रतिशत तक खराबी पर 20,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। वित्तीय अनुमति मिलते ही यह मुआवजा सात दिन के भीतर सीधे प्रभावित किसानों व परिवारों के खातों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी दो सप्ताह में विशेष गिरदावरी पूरी करेंगे तथा प्रत्येक तहसीलदार या नायब तहसीलदार प्रभावित गांवों का दौरा करेंगे।
मकानों के नुकसान संबंधी डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि 1 अगस्त 2025 से मुआवजे की दरों में वृद्धि की गई है, जिसके तहत पूरी तरह नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1,20,000 रुपए और न्यूनतम 15 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 40,000 रुपए प्रति मकान दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में पीडब्ल्यूडी और पंचायती विभाग के एक्सीयन, एस.डी.ओ. तथा जे.ई. निर्धारित समय सीमा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और जियो-टैगिंग फोटो निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपलोड की जाएगी।
पशुधन की क्षति के मामलों में पशु चिकित्सा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो मृत पशु की फोटो लेंगे तथा यदि पशु दफना दिया गया हो या बाढ़ में बह गया हो तो 2024 के नवीनतम पशुधन सर्वेक्षण और टीकाकरण रिकॉर्ड के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। गांव स्तर पर पूछताछ भी की जाएगी ताकि कोई योग्य प्रभावित मुआवजे से वंचित न रहे। विशेष गिरदावरी 14 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं और प्रत्येक विभाग कम से कम 20 प्रतिशत मामलों की रैंडम जांच करेगा। ड्राफ्ट रिपोर्ट एक सप्ताह के लिए सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियों का निपटारा छह दिनों के भीतर किया जाएगा, जबकि अंतिम रिपोर्ट को डिप्टी कमिश्नर की स्वीकृति के बाद प्रदेश स्तरीय समिति को भेजा जाएगा, जो तीन दिनों में निर्णय लेगी।
आशिका जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नुकसान का आकलन निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए ताकि कोई भी योग्य प्रभावित परिवार सरकार की सहायता से वंचित न रह जाए।
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